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वैलेंटाइन डे, भारतीय संस्कृति का पतन

भारतीय संस्कृति और सभ्यता को जाने बिना उसकी वैज्ञानिकता का आधार ज्ञात नहीं हो सकता है। भारतीय संस्कृति और सभ्यता को यदि अध्ययन करना है तो ग्रहों की गति से पर्यावरण की रक्षा करना सीखें।

सत्यम् लाइव, 14 फरवरी 2021, दिल्ली।। भारतीय संस्‍कृति और सभ्‍यता को समझने के बाद सम्‍पूर्ण विश्व का स्‍वयं को धन्‍य मानता रहा है इस पूरी प्रक्रिया को समझने के बाद कुछ दुष्ट बुद्धि ने इसे नष्‍ट करने की योजना बनाई और वो योजना ऐसी बनाई गयी कि सर्वप्रथम भारतीय शास्‍त्रों को अन्धविश्वास पर खूब प्रचार प्रारम्भ किया गया। इस विषय को आज के स्‍वदेशी प्रेरिक बने राजीव दीक्षित जिन्हेंं आज लोग महर्षि राजीव दीक्षित कहते हैं उन्‍होंने पूरे इतिहास सहित अपने व्‍याख्‍यानों में इस पर भी प्रकाश डाला। महर्षि राजीव दीक्षित के कुछ शिष्यों मेें से एक, इंजिनियर नितिन पाण्‍डेय ने अपनी कलम से कुछ तथ्य पेश किये हैं अगर कोई वैलेंटाइन डे की असलियत पूछे तो आप उसे अवश्य ही बतायें।

इतिहास:- रोमन साम्राज्य में एक क्‍लॉडियस नाम का राजा हुआ करता था और उसी समय वैलेंटाइन नाम के पादरी थे जिन्‍हें भारतीय संस्कृति और सभ्यता को रोम में प्रचार कर रहे थे और लोगों से कहते थे कि विवाह करके एक स्‍त्री के साथ जीवन यापन करो जैसा कि भारत के लोग करते हैं। पुरे यूरोप की सभ्यता में स्त्री को आज भी उपभोग की वस्तु माना जाता है। यूरोप की संस्कृति में आज भी कई स्त्रियों के साथ सम्बन्ध रखने की प्रथा है। दस-दस स्त्रियों से सम्बन्ध रखना उनकी रीति है।

उन्‍होंने चर्च में विवाह कराकर, एक स्‍त्री और पुरूष को साथ रहने की सलाह देने लगे और लोगों को भारतीय संस्‍कृति और सभ्‍यता का पालन करने को कहने लगे। ये बात रोम के राजा क्‍लॉडियस पसन्द नहीं आयी क्योकि ये काम यूरोप संस्कृति के विरोध में था। राजा ने घोषणा कर दी किे वैलेनटाइन को फांसी 14 फरवरी 498 ई. को हजारो लोगो के सामने खुले मैदान में फांसी दे दी जायेगी। फांसी के बाद जिन लोगो की वैलेंटाइन ने विवाह कराया था वो सब मिलकर वैलेंटाइन डे मनाना शुरू कर दिया और ये यूरापियन सभ्यता पिछले 20 सालों के अन्‍दर जब से हम सब ग्‍लोबल हुए हैं तब से हमारे यहॉ और ज्‍यादा प्रचारित हुई है।

मुर्खता के कारण भारतीय मानते हैं वैलेटाइन डे:- भारत में 16 संस्कारों में से एक संस्कार है विवाह और भारत में भगवान राम, भगवान कृष्‍ण और लगभग सभी ऋषि विवाह करके ही रहते थे। भारत के कुछ पवित्र मन्दिर है जहॉ पर प्रवेश ही पत्नी के साथ मिलता है फिर क्यों ऐसी मूर्खता पूर्ण बिना सोचे समझे हम सब ये गलत परम्‍परा अपना रहे हैं।

हर दृष्टि‍कोण में बाजार:- किसी भी देश की संस्‍कृति और सभ्‍यता का आधार वहॉ का पर्यावरण होता है जैसे कि हम सब भारत में रहते हैं हमारी संस्कृति और सभ्यता का आधार अपरिग्रह से प्रारम्भ होता है क्योंकि भारत की भूमि उपजाऊ है और समस्त जीव पहले तो अपने पेट के विषय में सोचने हैं और भारत के प्रकृति और पर्यावरण में सूर्य देव बहुत दयाल हैं इसी कारण से हम सब जितना है उतने से सन्तुष्ट हो जाते है परन्तु यूरोप की सभ्यता पैसा मूल में है और पैसा ही जीवन है इसी कारण से भारत में वैलेंटाइन का प्रचार हुआ है।

इससे विदेशी कंपनियाेें को फायदा ये हुआ कि उनका कार्ड, खिलौने, दिल वाले खिलौने, कंडोम, गर्भनिरोधक गोलियां, परफ्यूम, जहरीली और मांसाहारी चौकलेट (जिनमे जानवरों का मॉस है) शराब, विषैली कोल्ड ड्रिंक साथ ही पहनावे में अश्लीलता पूर्ण कपड़ाेें के साथ घटिया से घटिया सामान बेचा जा रहा है जिससे भारत के भोले भाले नागरिकों का लगभग हजारो करोड़ रुपया भारत से लिये जा रहे हैं। अब ये आपको सूचना है कि अश्लीलता पूर्ण प्रेम दिवस मनाकर शराब पीजिये या जहरीली कोल्ड ड्रिंक पिजिये और केक खाइए और विदेशी वस्तुए खरीद कर भारत का पैसा विदेश भेजिए ?

सुनील शुक्ल

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