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अफवाओंं से बचे, अष्‍ठदशाभुजाधारी को समझें।

नववर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं। चैत्र लगते ही नीम के पत्‍तेे खाये किसी भी वायरस अगले दो माह के लिये दूर भगायें।

सत्‍यम् लाइव, 24 मार्च 2020, दिल्‍ली। हर बार की तरह अफवाओं का बाजार बहुत गर्म है जिसको जहॉ से तस्‍वीर मिली उसनेे वो अपनी संवेदनाओं के अनुुुुुसार शेयर करने में लग जाती हैै। अफवाओं में बाजार ऐसा गर्म है कि एक व्‍यक्ति रात्रि में सोया सुबह पत्‍थर का हो गया। ऐसी खबर वायरल हो रही है रूस के प्रधानमंत्री ने सडकों पर 800 शेर छोडवा दिये है जिससे जनता बाहर न निकले। जब इस पर पूरी तफतीश की गयी तब पता चला कि वो तो किसी दक्षिण अफ्रीका केे मूवी का दृश्‍य है। अपनी बुद्वि के अनुसार ही व्‍यक्ति अपनी कयास लगाकर पाई हुई तस्‍वीरों को पाते ही शेयर कर देता है। एक तरफ जहॉ वायरस अपने कदम बढा रहा है वहीं दूसरी तरफ अफवाओं ने इतना बाजार गर्म कर रखा है कि अच्‍छा खासा पढा लिखा आदमी भी उसकी पकड में है। पुणे से दिल्‍ली आने वाली विमान में एक यात्री को जुकाम होने पर छींक आ गयी इतने में ही विमान पायलट ने कॉकपिट से छलांग मार दी। फिर पूरे यात्री को आपातकालीन गेट से बाहर निकाला गया।

कल से नववर्ष के आगमन के साथ ही आप सबको अष्‍ठदशाभुजाधारी के चरणों में जाकर जाप करने को भी मिलने वाला है। सूर्य की गति जानने वाला भारतीय ज्‍योतिष शास्‍त्र का ज्ञाता यदि इस तरह से डर बिठाकर जीवित रहेगा तो इसका अर्थ ऐसा ही निकलता है कि उसने आयुर्वेद के माध्‍यम से होने वाली सूर्य की गति को विसार दिया है। हेमन्‍त ऋतु में जमा हुआ असर बसन्‍त ऋतु मेें असर दिखाता है ये तो युगों युगों से कहा जा रहा है। अपने शरीर के तापमान से 4 डिग्री कम के पानी को छोडकर यदि ज्‍यादा ठण्‍डा पानी पीया जाये तो कीटाणु जन्‍म लेगा ही अन्‍यथा अष्‍ठदशाभुजाधारी द्वारा दिये गयेे अठारह पोषक तत्‍व किसी भी खतरनाक वायरस से हमारी रक्षा करता है। उस पर भी आज के विज्ञान के हिसाब से सूर्य की गर्मी जो 27 डिग्री पर कोई भी वायरस जीवित नहीं रह पाता। फिर भारत के निवासी को अपने शास्‍त्रों के अनुसार पहले अन्‍धविश्‍वास और विश्‍वास में अन्‍तर समझना होगा। भारतीय शास्‍त्रों में निमेष की गणना की गयी है निमेष का अर्थ है पलक झपकना। भगवान शंंकर की तीसरी नेत्र का वर्णन जगह जगह मिलता है। आर्यभट्ट जी ने गणित मेें त्रुटि की गणना भी की है प्रकृति की देवी अष्‍ठदशा भुजाधारी की एक त्रुटि से भगवान शंकर 1/100 का 1/30 बार पलक झपक चुके होते हैं। ये एक गणित है। जिसको अन्‍धविश्‍वास बताकर हमें विज्ञान की नवीन परिभाषा को जन्‍म दे दिया गया है। प्रकृति को समझे ि‍बिना आप बीमार होगें ही क्‍योंकि आयुर्वेद संक्रमण काल की बात करता है अर्थात् सूर्य की गर्मी परिवर्तित करके अपने ग्रहों की चाल से कीटाणु को उत्‍पन्‍न करता रहता है और मारता रहता है। अगस्‍त्‍य तारे का इस कार्य को करने में विशेष महत्‍व भी बताया गया है अत: भारतीय शास्‍त्रों के अनुसार अपनी दिनचर्या को ठीक करें जिस पर सारे शास्‍त्र जोर देकर कह रहे हैं और अपने शरीर में जन्‍म लेने वाले कई करोड कीटाणु को इसी अष्‍ठदशाभुजाधारी की कृपा से नष्‍ट करें। देशी गाय के घी से हवन करें या दीपक जलायें। प्राणवायु भी किसी भी कीटाणु का नाश कर देती है। देशी गाय के गोबर का कण्‍डा जलायें। प्राणवायु अर्थात् आक्‍सीजन को बढाये हर मुशिबत से निजात पायें। आसुरों की समाप्ति आपके माध्‍यम से करने हेतु नवरात्रि बनाये गये थे।

उपसम्‍पादक सुनील शुक्‍ल

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