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मानसिक गुलाम बनाता ये सोशल डिजिटल

सत्यम् लाइव, 28 अगस्त 2021, गुजरात।। अहमदाबाद से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने शर्मसार कर दिया है ऑनलाइन पढ़ाई को बढ़ावा दिया जा रहा है परन्तु ये ऑनलाइन पढ़ाई से बच्चों को पर मानसिक क्या असर पड़ रहा है? इससे जानते हुए भी मीडिया शान्त से लेकर शासन और प्रशासन इसे आगे बढ़ाता हुआ चला जा रहा है अभी तक के प्राप्त हुए खबरों में आपने देखा कि एक बच्चे ने अपने माता के खाते से पैसे निकालकर गेम खेलकर जुॅए में हार गया और उसके बाद नोटस् लिखकर आत्महत्या कर ली।

अब मामला सामने आया है जो अहमदाबाद को है एक 15 साल की एक बच्ची अपने न्यूड वीडियोज बनाकर सोशल मीडिया पर अपलोड करने लगी। जब उसके माता-पिता ने बेटी के ये वीडियो देखे तो दोनों को अटैक आ गया। नौकरी करने वाले माता-पिता ने ऑनलाइन पढ़ाई के लिए बेटी को नया मोबाइल खरीदकर दिया था लेकिन बेटी को मोबाइल की ऐसी लत लगी कि हर वो समय सिर्फ मोबाइल में ही लगी रहती थी। बेटी ज्यादातर घर पर अकेली ही रहती थी।

वैसे सोशल मीडिया पर ऐसे बहुत सी रोजाना वीडियो बनाकर अपलोड किये जा रहे हैं कमेंट्स भी किये जा रहे हैं साथ ही रिप्लाई का दौरा भी चल रहा है। इस लाइक और कमेन्ट्स को लेकर प्रसन्न होने वाले इस स्तर पर तक मानसिक तौर पर विकलांग हो सकते हैं इसका उदाहरण आपको सोशल मीडिया पर मिल जाता है परन्तु मौन धारण किये हुआ आज का समाज जिस विकास को अपना जीवन का लक्ष्य बना चुका है वो उसे पतन की ओर लिये जा रहा है। ये मानसिक गुलामी ही, भारतीय संस्कृति और सभ्यता का पतन है।

भारतीय शास्त्रों की वैदिक नारी को विकास नाम पर मोड़ दिया और ले जाकर खड़ा कर दिया है जिसे कलयुग में नारी सशक्तिकरण कहा जा रहा है। ये नारी सशक्तिकरण या नारी के चरित्र का पतन, इस पर किसी का ध्यान नहीं है बल्कि फिल्मी कलाकार ने भी जहाँ पर भारत की सभ्यता और संस्कृति को ले जा रहे हैं उसमें ये नहीं कह सकते हैं कि भारतीय राजनीति उनके साथ नहीं है।

ये तो अच्छा हुआ कि इस बच्ची के कुछ वीडियो पर उसकी मौसी की बेटी ने की नजर पड़ गयी तो उसने यह जानकारी माता-पिता तक पहुॅचाई। तब हेल्पलाइन की टीम ने उसके सारे वीडियो डिलीट करवाए और फिर उसको साइबर क्राइम के बारे में भी समझाया। ये समाचार हम सभी को सचेत करता है कि मोबाईल कितना ज्यादा अवैज्ञानिक है जो सीधा मानसिक रोगी बनाता है।

सुनील शुक्ल

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