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सदा सुहागिन मधुशाला

एक बरस में एक बार होली आती है और एक बार ही दिवाली आती है बच्‍चन जी कहते हैं कहते हैं कि ”दिन में होली, रात दिवाली, रोज मनताी मधुशाला।”

सत्‍यम् लाइव, 5 मई, 2020, दिल्‍ली।। आज मुझे हरिवंश राय बच्‍चन की ”मधुशाला” की तब याद आ गयी जब सरकार ने नोवेल कोरोना के संकट से उभरने के लिये रेड जोन तक में, सभी क्षेत्रों में मधुशाला को खोलने की अनुमति प्रदान कर दी और वो लाइन और ताजा हो गयी जब शराब की दुकानों पर लम्‍बी-लम्‍बी कतारों में खडे लोगों ने लक्ष्‍मण रेखा को तोडते हुए देख कई स्‍थानों पर पुलिस को लाठी चार्ज करने पडे और आज सब हिन्‍दु-मुस्लिम भूल गये तब मधुशाला में लिखी ये लाइन तरोताजा हो गयीं कि ”मुसल्‍मान औ’ हिन्‍दू हैंं दो, एक, मगर, उनका प्‍याला, एक, मगर, उनका मदिरालय, एक, मगर, उनकी हाला; दोनों रहते एक न जब तक, मस्जिद-मन्दिर में जाते, बैर बढाते मस्जिद-मन्दिर, मेल कराती मधुुशाला।” इन पंक्तियों पर अब शक नहीं रहा है आज कोई किसी सेे नहीं पूछ रहा था कि तुम किस जाति के हो कहीं कहीं तो एक दूसरे के ऊपर चढते नजर आये, तो कहीं पर पसीने से लत-पत हुए अब नोवेल कोरोना की चिन्‍ता नहीं रही ये पूरी वही टीम थी जो सुबह-शाम नोवेल कोरोना का नाम लेकर भगवान को मना रही थी शायद वो इसी कारण से मना रही कि सब एक साथ बैठकर पियेगें तो भूल जायेगें कि ये गिलास किसका झूठा है और तो और इस लम्‍बी कतार मेें कही तो इस कतार मेंं महिलाओं ने भी नारी सशिक्‍‍‍तकरण दिखाती नजर आयीं।

इसे भी पढे – https://www.satyamlive.com/wp-admin/post.php?post=7197&action=edit 1897, प्‍लेग महामारी का लॉकडाउन

नारी सशिक्‍‍‍तकरण का कलयुगी स्‍वरूप

शराब से आफतः लाठीचार्ज, लंबी-लंबी कतारेंं दिल्ली सहित भारत के कई राज्यों में शराब की दुकाने खोलने का फैसला सिरदर्द बनता जा रहा है। शराब के शौकीन लोगो ने लाॅकडाउन और सोशल डिस्टेसिंग जैसी सारी लक्ष्मण रेखाओं को तोड़कर जो हुआ उस पर नजर डालते हैं शराब के ठेकों के आगे 500 से 600 तक लोगों की लाइन लगी थीं और कहीं तो दुकान के दोनों तरफ इतना ही आदमी खडा था। दिल्ली सहित भारत के अधिकतर जगहों पर सोशल डिस्टेसिंग की धज्जीया उड़ती नजर आई, दिल्ली के नरेला, करोलबाग, चन्द्रनगर, नरेला, गीता-काॅलोनी जैसे इलाकों सहित पूर्वी दिल्ली में शराब की दुकानें बंद कर दी गई हैं और कई जगहों पर पुलिस को लाठी-चार्ज करना पड़ा है। दिल्ली के दरियागंज में, शराब की एक दुकान पर 600 लोगों की लाइन लगी हुई है। इसी तरह कोलकाता में भी भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को लाठी चार्ज करना पड़ा है। सरकार के एक अधिकारी के अनुसार केन्द्रीय गृह मंत्रालय (एमएचए) के लाॅकडाउन के नियमों में छूट देने के साथ कहा कि दिल्ली में शराब की करीब 150 दुकानो को खोलने की अनुमति दी गई है, दिल्ली में सरकारी एजेंसियों और निजी तौर पर चलाई जाने वाली 850 शराब की दुकानें को भी अनुमति है।

छोडा मैनें पंथ-मतों को तब कहलाया मतवाला

शराब की बिक्री से सरकारी खजाने को आय का एक बड़ा हिस्सा मिलता है
लाॅकडाउन की वजह से पैदा हुए राजस्व प्राप्ति के संकट को देखते हुए सरकार ने देश में, 4 मई 2020, सोमवार से, न केवल शराब की दुकानों को खोलने की अनुमति दी है बल्कि जरुरी सामानों से जुड़े उद्योगों को पूरी क्षमता के साथ काम करने की इजाजत दी है। समाजिक कार्यकर्त्‍ता मनोज बाथम ने आश्‍चर्य के साथ कहा कि भारत में शराब से राजस्‍व पूर्ति की बात की जा रही है और दूसरी तरफ भला कैसेे आयुर्वेद पर काम किया जा सकता है अगर आज शराब को छोडकर सरकार, आयुुर्वेद राजस्‍व बढाने को सोचती तो आज निश्चित ही भारतीय शास्‍त्रों केे हिसाब से राजस्‍व बढता। इस फैसला को महर्षि राजीव दीक्षित के अनुयायी तथा स्‍वदेशी के समर्थक दुर्भाग्‍यपूर्ण ही कहेगें। आपको बता दें कि शराब की बिक्री से, सरकारी खजाने को एक बड़ा हिस्सा मिलता है, इससे कमाई के ताजा वित्तीय वर्ष के आंकड़े किन्‍हीें कारणों से उपलब्ध नही हो पाये परन्‍तु 2018-19 के आंकड़े के मुताबिक सरकार को केवल इस मद में 23,918 करोड़ की राजस्व आमदनी हुई थी जो 2017-18 के मुकाबले 38 गुना ज्यादा थी लेकिन इस वित्तीय वर्ष में सरकार को इस मद में, भारी नुकसान होने का अनुमान है क्‍योंकि वित्तीय वर्ष 2020-21 के पहले महीने अप्रैल में यह कारोबार पूरी तरह बंद रहा। वशर्ते अन्‍जाम चाहे जो भी हो परन्‍तु इतना अवश्‍य कहूॅगा कि ”सूर्य बने मधु का विक्रेता, सिन्‍धु बने घट, जल हाला, बादल बन-बन, आए साकी, भूमि बने मधु का प्‍याला, झडी लगाकर बरसे मदिरा, रिमझिम, रिमझिम, रिमझिम कर, बेलि, विटप, तृण बन मैं पीऊॅ, वर्षा ऋतु हो मधुशाला।। सरकार के उस निर्णय पर कि रेड जोन में और दूर शराब की दुकाने खोली जायेगी मैं भी हतप्रभ हूॅ क्‍योंकि मैं तो महाकवि बच्‍चन जी की इस लाइन में थोडा सा परिवर्तन करके कहूॅ्गा कि ”मैं ब्रम्‍हाण कुलोद्भव मेरे, पुरखों ने मातृभूमि को ऐसा ढाला, मेरे तन के लोहू में, सौ प्रतिशत गंंगा जल डाला, पुश्‍तैनी अधिकार मुझे है, वेदों के उस आंगन में, मेरे दादों-परदादों के हाथ खडी थी वेदशाला।।

उपसम्‍पादक सुनील शुक्‍ल

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