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गौशाला के साथ अब वैदिक शिक्षा व्यवस्था …श्री राघव गौवर्धन गौशाला समिति

सत्यम् लाइव, 11 जुलाई 2021, दिल्ली।। उत्तर प्रदेश के शिवली कानपुर देहात में स्थित श्री राघव गौवर्धन गौशाला समिति, यह एक ऐसा संगठन है जो कि बेसहारा गायों एवं अन्य जीव जंतुओं की देख रेख वर्षों से सुचारू रूप से कर रहा है। इस गौशाला के प्रबंधक एवं संचालक श्री राघव शुक्ल हैं। जिन्हे हाल ही में इंटरनेशल बुक ऑफ वर्ल्ड रिकार्ड तथा इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड एवं अन्य प्रमुख राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय सम्मानों से सम्मानित किया गया जा चुका है। सबसे कम उम्र के गौ सेवक के कारण उन्हें कई सम्मान दिये गये हैं एनजीओ श्री राघव गोवर्धन गौशाला समिति के माध्यम से भी गाय पुनर्वास के लिए अनुकरणीय कार्य करने के लिए सराहा जा रहा है।

एनजीओ की स्थापना 2012 में की गयी तथा 2015 में सरकारी मान्यता प्राप्त हुई। एनजीओ अपनी गौशाला में 200 से अधिक गायों को रखकर, उनकी सेवा मातृत्व भाव के साथ तथा देख-रेख की जा रही है। इन गायों की दैनिक जरूरतों का विधिवत ख्याल रखते हुए, इस गौशाला को और अधिक विकसित करने का प्रयास निरंतर जारी है। श्री राघव गौवर्धन गौशाला समिति के मुख्य प्रवक्ता एवं सदस्य श्री सुनील शुक्ल जी से बात करने पर, उन्होंने हमें और जानकारी दी की आगे हम जल्द ही जैविक खाद्य से लेकर और अन्य तमाम पंचगव्य एवं प्राकृतिक स्वदेशी प्रोडक्ट का उत्पादन करने वाले है, साथ ही भारतीय समाज में उस शिक्षा व्यवस्था को पुनः स्थापित करने का प्रयास करने वाले हैं जो हमारे समाज से वो कहीं लुप्त हो गया है और ये वही शिक्षा होगी जो हमारे ऋषियों-मुनियो ने समाज के लिये स्थापित की थी।

इसका विश्लेषण करते हुए कहा कि वैदिक गणित की बात कर रहे हैं जो रसोई के माध्यम से, भारत की नारी को वैदिक नारी बनाती है। जिसका ज्ञान हमारी माताओं को ज्ञान था और भारत में वैदिक नारी का सबसे बड़ा खिताब माता सीता को भारतीय शास्त्र देता है परन्तु पश्चिम नकल करते-करते वो कहीं लुप्त हो गया है। अब वो समय आ गया है जब उस शिक्षा व्यवस्था से समाज को पुनः अवगत कराया जाए। इसको भी हम सब इसी एनीजओ के माध्यम से कई क्षेत्रों में प्रारम्भ करने जा रहे हैं पिछले तीन तीन सालों इसका श्री गणेश भी हमने दिल्ली में किया था। दिल्ली में वैदिक शिक्षा केंद्र के नाम से, हम सबने 6वीं कक्षा से लेकर 12वीं कक्षा तक के बालक-बालिकाओं को इससे अवगत कराया। खास कर बालिकाओं को जब इसका ज्ञान कराया तो देखा कि वो बच्चियॉं वैदिकता के आधार पर अपन घर परिवार को स्वस्थ रखती हैं बल्कि आधुनिकता के साथ भारतीय तकनीकि को भी पहचान कर समाज को एक सही दिशा दे रही हैं।

मंसूर आलम

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