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पस्‍त अर्थव्‍यवस्‍था पर सूक्ष्‍म बचाव

  • चीन उठा सकता है पस्‍त अर्थव्‍यवस्‍था का फायदा
  • चीन बढा रहा है अपना निवेश
  • कोरोना के बाद पूॅजी लगा रहा है दूसरे देश में
  • यूरोप ने एफडीआई के नियम सख्‍त किए

सत्‍यम् लाइव, 23 अप्रैल, 2020 दिल्‍ली।। चीन अपने यहॉ पर नोवेल कोरोना को दाम देने के बाद अपने मौजूदा हालात को मजबूत करने में लग गया है चीन लगातार दूसरे देश की कमजोर पडी अर्थव्‍यवस्‍था में हिस्‍सेदारी बडा रहा है। उसमें भारत पर भी अपने पॉव जमाने का प्रयास किया है साथ ही खबर आ रही है कि प्रयक्ष विदेशी निवेश की नीति पर भारत सहित कई देश बढते निवेश कोरोकने के प्रयास में लगेे हुए है। यूरोपीय संघ से खबर तो साफ है कि एफडीआई के नियमों में बदलाव कर लिये हैं। इसमें जर्मनी, फ्रांस, इटली, स्‍पेन आदि प्रमुख देश हैं। 25 मार्च को ही यूूूूूूूूरोपीय संघ ने अपने सदस्‍यों को चेतावनी देकर बता दिया था कि एफडीआई पर अधिग्रहण हो सकता है। पहले जर्मनी की एंजेला मर्केल सरकार ने नियम बनाये फिर 17 मार्च को ही स्‍पेन की सरकार ने, साथ ही इटली ने 8 मार्च 2020 को एक गोल्‍डेन लॉ पर काम किया। सवंदनशील क्षेत्रों पर विदेशी निवेशा पर अंकुश लगा दिया है। इटली कोरोना प्रभावित क्षेत्रों मेें से एक है साथ ही खस्‍ताहाल कम्‍पनियाेें को कोई भी सस्‍ती कीतम में ले सकता है। कनाडा ने 18 मार्च 2020 को विदेशी निवेश पर बदलाव किया है तथा प्राप्‍त सूचना के अनुसार ऑस्‍ट्र्रेलिया ने 30 मार्च को अपने संसदों के साथ बैठक में सबसे कहा कि हमारी हेल्‍थ आदि के कई सेक्‍टर को चीन जैसे देश की सरकारी कम्‍पनियॉ खरीद सकती हैं। इसी संदर्भ में ब्रिटेन ने आदेश जारी किया है कि ब्रिटेन में सैन्‍य, कम्‍प्‍यूटर हार्डवेयर, क्‍वांटम टेक्‍नोलॉजी आदि में तभी कुछ खरीद फरोस्‍त होगा जब सरकारी मंजूरी ले ली जाये। इस लेख में अमेरिका भी पीछेे नहीं रहा उसने तो भारत से आने वाले एच1 बीजा पर भी रोक लगाई है साथ ही विदेशी कम्‍पनियों द्वारा किसी भी संभावित खरीद के लिये विदेशी निवेश समिति सक्रि‍य कर दी है ये समिति राष्‍ट्रीय सुरक्षा के आधार पर जॉच करेगी।

पाकिस्‍तान, बांंग्‍लादेश के बाद चीन को निवेश पर लेनी होगी अनुमति

भारत ने भी की तैयारी

जब सब यूरोपिय देश सहित समस्‍त देश अपने देश में विदेशी निवेश के सख्‍त खिलाफ होकर एक मत हैं तब भारत भी इसी क्षेत्र में आगे आकर काम करता है यह फैसला 17 अप्रैल 2020 को किया गया है और एफडीआई के नियम में बदलाव करते हुए कहता है कि ”ऐसा देश जिसकी सीमा भारत से लगी हो वहॉ की किसी भी कम्‍पनी को बिना सरकारी मंजूरी के निवेश करने की अनुमति नहीं होगी। अगर कोई निवेशी भी उस देश का नागरिक हो तो भी यही नियम लागू होगा।” साथ ही अप्रत्‍यक्ष अधिग्रहण पर भी रोक लगा दी है। अर्थात् चीन से प्रत्‍यक्ष या अप्रत्‍यक्ष रूप से निवेश पर पहले अनुमति लेनी पडेेगी। अभी तक सिर्फ बांग्‍लादेश और पाकिस्‍तान पर ही अनुमति लेनी पडती थी।

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पहले से किया निवेश

इससे पहले की भारत इस विषय पर काम करता तब तक पीपल्‍स बैंक ऑफ चाइना ने भारत की सबसे बडी गैर बैंकिग होल लोन कम्‍पनी एचडीएफसी में अपनी हिस्‍सेदारी 0.8 से बढाकर 1.01 फीसदी कर ली है। जबकि दिसम्‍बर 2019 तक चीन की कम्‍पनियों ने भारत में 8 अरब डॉलर अर्थात् 61 हजार करोड रूपये का निवेश कर रखा था। यह निवेश मुख्‍य रूप से मोबाईल फोन, इलेि‍क्ट्रिक, इन्‍फ्रास्‍ट्रक्‍चर, ऑटोमोबाइल मेंं है। चीन ने समस्‍त देशों द्वारा बनाये गये नियमों को WTO के नियमों के विरोद्ध बताया है। भारत को भी अपने पडोसी ही नहीं बल्कि समस्‍त यूरोपियन देशों के लिये नियम बनाना चाहिए। भारत अब सब देशोंं के लिये उपनिवेेशक बन कर रह गया है।

उपसम्‍पादक सुनील शुक्‍ल

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