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गणेश चतुर्थी की पौराणिक कथा

सत्यम् लाइव, 9 सितम्बर 2021, दिल्ली।। भारतीय शास्त्रों के अनुसार हरतालिका तीज तिथि के अगले दिवस की तिथि को गणेश चतुर्थी पड़ती है। इसी दिवस से गणेश चतुर्थी पर्व अगले 10 दिनों तक मनाया जाता है। इस वर्ष 10 सितंबर 2021 से प्रारम्भ होकर, इस पर्व का समापन अनंत चतुर्दर्शी अर्थात् 19 सितंबर 2021 को होगा। जिसे गणेश विसर्जन के नाम बड़े धूमधाम से मनाया जाता है।

कथाः- हिंदू पंचाग के अनुसार भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को भगवान गणेश का जन्म हुआ था। पौराणिक कथा के अनुसार एक बार पार्वती माता स्नान करने के लिए जा रही थीं। उन्होंने अपने शरीर के मैल से एक शरीर का निर्माण किया और उसमें प्राण डाल दिए। माता पार्वती ने गृहरक्षा के लिए उसे द्वारपाल नियुक्त करके स्नान करने चली गयीं और कहा कि किसी को अन्दर मत आने देना। अपनी माता की आज्ञा का पालन करते हुए भगवान शिव को भी घर में जाने से रोक दिया। भगवान शंकर क्रोध में आकर उनका मस्तक काट दिया। माता पार्वती ने जब अपने पुत्र की ये दशा देखी तो वो बहुत दुखी और क्रोधित हो गयीं। शिवजी ने उपाय के लिए गणेश जी के धड़ पर हाथी यानी गज का सिर जोड़कर उनका नाम गजानन रख दिया।

सुनील शुक्ल

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