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भारतीय शास्त्रों का ज्ञाता किसान

अपरिग्रह जो भारतीय शास्त्रों में बताया गया है उससे ही अहिन्सा का जन्म होता है और देखने को मिला कि पिछले 68 दिनों में किसान की तरफ से एक भी हिन्सा की प्रतिक्रिया नहीं हुई जबकि सरकार अपनी राजनीति से बाज नहीं आयी और हिन्सा कराने पर उतरू है।

सत्यम् लाइव, 3 फरवरी, 2021, दिल्ली।। ये बात मैं अब दावे के साथ कह सकता हूॅ कि सरकार ही है जो भारतीय शास्त्रों को विसार चुकी है परन्तु गाॅव सरकार किसान को खुशहाल करने के लिये का गरीबी में वसर करने वाला किसान अभी भी भारतीय शास्त्रों को जानता है और यदि वो अपिग्रह को मानते हुए सरकार से फायदा नहीं लेना चाहता तो सरकार क्यों पीछे पड़ी है? कि ये कानून से आपको फायदा होगा। कारण IMF, WTO, WHO, WB हो परन्तु सरकार यदि नहीं झुकी तो अब टूट जायेगी। अपरिग्रह जो भारतीय शास्त्रों में बताया गया है उससे ही अहिन्सात्मक का जन्म होता है और देखने को मिला कि पिछले 68 दिनों में किसान की तरफ से एक भी हिन्सा की प्रतिक्रिया नहीं हुई जबकि सरकार अपनी राजनीति से बाज नहीं आयी और हिन्सा कराने पर उतरू है। सरकार किसान को खुशहाल करने के लिये जबरदस्ती जो तीन कानून बनाकर दे रही है परन्तु सरकार को ये नहीं पता कि भारतीय शास्त्रों का पालक किसान, अपरिग्रह को ठीक से समझता है और यदि भारतीय शास्त्रों का पालक किसान यदि आपकी दी हुई सुविधाऐं न चाहकर यदि स्वयं आत्मनिर्भर बनाना चाहता है तो सरकार क्यों परेशान हो रही है।

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ये सरकार क्यों नहीं बताती है? सरकार कहती है कि किसान के लिये ये नियम लाभकारी है परन्तु किसान कह रहा है कि मुझे इन नियमों से लाभ नहीं चाहिए तो फिर सरकार मान क्यों नहीं लेती है कि ये कानून न बनाया जाये। किसान अहिन्सात्मक तौर पर अपनी बात रख रहा है परन्तु सरकार अपनी जिद्द पर अड़ी है कि नहीं आपको ये कानून बनाकर किसान को लाभ पहुॅचाकर ही रहेगें और स्थितियाॅ बदलती सी नजर आ रही है। 68 दिनों के इस अहिन्सात्मक आन्दोलन के बाद भी किसान लगातार अपनी उपस्थिति दर्ज कराता चला आ रहा है एक तरफ तो मोटर-साईकिल की भीड़ देखी जा रही है तो दूसरी तरफ भारतीयता के आधार पर बैलगाड़ियाॅ भी इस आन्दोलन का हिस्सा बन चुकी है। 2014 के चुनाव में गौ माता को पूजती बीजेपी सरकार ने अब तो जो कुछ भी गौ माता पर कानून नहीं बनाया उसका गुस्सा हिन्दु नहीं बल्कि मुस्लिम परिवार भी नाराज नजर आ रहे हैं इस आन्दोलन की सबसे बड़ी विशेषता यही है कि इस आन्दोलन में किसी जाति विशेष का न रहकर बल्कि अब भारतीय किसान का हो चला है। सारे ही मुद्दे अब 2024 तब जाग्रत रखने का एक बड़ा फैसला भी सामने आने लगा है।

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दिल्‍ली सीमा पर और बढी जनसंख्‍या

सभी राजनीतिज्ञ पार्टियों में उठापटक प्रारम्भ हो गयी है यहाॅ तक की खबर है कि बीजेपी के अन्दर भी कुछ बाॅटने की खबर आ रही है वैसे अभी तक ये खबर आफिसयल नहीं है परन्तु कुछ बड़ी खबरों पर अन्देशा अवश्य लगाया जा रहा है। अधिकारिकतौर पर इनता ही कहा जा सकता है कि सरकार को ये समझ लेना चाहिए कि ये किसान है सीमा पार खड़े कोई भारत विरोधी नहीं है जो इतनी मजबूत दीवार खड़ी की जा रही है। सोशल मीडिया द्वारा या फिर आप जब स्वयं वहाॅ जाकर देखेगें तभी आपको कुछ सच्ची खबरें मिल पायेगीं। सच्ची खबरों की स्थिति अब यहाॅ तक पहुॅच चुकी है कि मीडिया में जो अपरिग्रह को मानने वाला था वो रणभूमि सजाने में मदद कर रहा है तो वहीं दिल्ली पुलिस के सिपाही भी उनकी मदद करते नजर आ रहे हैं देश का रक्षक बल की भी बीच बीच में जो खबर आ रही है उससे साफ लग रहा है कि बीजेपी पार्टी का कार्यकाल अब दुबारा आ पाना खतरे में है।

Sunil Shukla

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