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जेल से रिहाई के बाद बोले अर्नब, मैं उद्धव को बहस करने की चुनौती देता हूं

सत्‍यम् लाइव, 12 नवम्‍बर 2020,दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट द्वारा अंतरिम जमानत मिलने के बाद पत्रकार अर्नब गोस्वामी तलोजा जेल से बुधवार शाम रिहा हो गए। अपनी रिहाई के बाद अर्नब ने कहा कि ‘यह सरकार द्वारा की गई एक गैरकानूनी गिरफ्तारी थी, जो यह नहीं समझता है कि वह मीडिया की स्वतंत्रता को पीछे नहीं धकेल सकता है। अगर उद्धव ठाकरे को मेरी पत्रकारिता से कोई समस्या है, तो उन्हें मुझे साक्षात्कार देना चाहिए। मैं उन्हें चुनौती देता हूं कि वे उन मुद्दों पर बहस करें जिनसे मैं असहमत हूं।’

बता दें कि उच्चतम न्यायालय ने आत्महत्या के लिए उकसाने के 2018 के मामले में महाराष्ट्र सरकार द्वारा पत्रकार अर्नब गोस्वामी के खिलाफ कार्रवाई पर सवाल उठाए और कहा कि इस तरह से किसी व्यक्ति की व्यक्तिगत आजादी पर बंदिश लगाया जाना न्याय का मखौल होगा। इसके साथ ही अदालत ने अर्नब और अन्य आरोपियों को अंतरिम जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया। गोस्वामी को पिछले बुधवार को गिरफ्तार किया गया था। अंतरिम जमानत मिलने के कुछ घंटे बाद गोस्वामी रायगड जिला स्थित तलोजा जेल से रिहा कर दिए गए।  गोस्वामी बुधवार शाम लगभग साढ़े आठ बजे जेल से बाहर आए। जेल के बाहर जुटे लोगों का उन्होंने कार में से हाथ हिलाकर अभिवादन किया। उन्होंने कहा कि वह उच्चतम न्यायालय के आभारी हैं। गोस्वामी ने विजय चिह्न प्रदर्शित करते हुए कहा कि ‘यह भारत के लोगों की जीत है।’ इससे पहले न्यायाधीश चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा था कि अर्नब और दो अन्य आरोपियों को 50 हजार रुपये के मुचलके पर अंतरिम जमानत पर रिहा किया जाए। पीठ ने पुलिस कमिश्नर को निर्देश दिया है कि आदेश का तत्काल पालन किया जाए।

न्यायमूर्ति धनंजय वाई चंद्रचूड और न्यायमूर्ति इंदिरा बनर्जी की पीठ ने कहा कि अगर राज्य सरकारें लोगों को निशाना बनाती हैं तो उन्हें इस बात का अहसास होना चाहिए कि नागरिकों की स्वतंत्रता की रक्षा के लिए उच्चतम न्यायालय है। शीर्ष अदालत ने इस बात पर चिंता व्यक्त की कि राज्य सरकारें कुछ लोगों को विचारधारा और मत भिन्नता के आधार पर निशाना बना रही हैं।

अर्नब गोस्वामी की अंतरिम जमानत की याचिका पर सुनवाई करते हुए पीठ ने कहा कि ‘हम देख रहे हैं कि एक के बाद एक ऐसे मामले आ रहे हैं, जिनमें उच्च न्यायालय जमानत नहीं दे रहे हैं और वे लोगों की स्वतंत्रता, निजी स्वतंत्रता की रक्षा करने में विफल हो रहे हैं।’

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