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WHO की कार्यकारी बोर्ड में हो सकता है भारत।

अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया का समर्थन प्राप्‍त है अब भारत को। सेनेटाइजर पर डब्ल्यूएचओ ने कहा कि यह लोगों पर क्लोरीन या अन्य जहरीले रसायनों का छिड़काव करने से आंखों और त्वचा में जलन, सांस संबंधी और सेहत से जुड़ी अन्य समस्याएं हो सकती हैं।

सत्‍यम् लाइव, 18 मई 2020, दिल्‍ली।। भारत अगले महीने विश्व स्वास्थ्य संगघठन डब्ल्यूएचओ के एग्जीक्यूटिव बोर्ड का चेयरमैन बनेगा। डब्ल्यूएचओ की 73वीं सलाना बैठक में इस फैसले को मंजूरी दी जाएगी। यह बैठक सोमवार और मंगलवार को होगी। इसके बाद 22 मई 2020 को एग्जीक्यूटिव बोर्ड की बैठक होगी। डब्ल्यूएचओ के कार्यकारी बोर्ड पर चीन के बजाय भारत का कब्जा हो सकता है और इसके लिए वीटो पॉवर अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया ने समर्थन किया है। दूसरी तरफ डब्ल्यूएचओ ने सावधान किया है कि कोरोना वायरस के संक्रमण को रोकने के लिए खुली जगहों पर कीटाणु नाशक का छिड़काव नहीं करना चाहिए, इससे कोरोना वायरस पर कोई प्रभाव नहीं होगा, बल्कि यह लोगों की सेहत के लिए हानि कारक हो सकता है। कई जगह खुले में और लोगों पर कीटाणु नाशकों का छिड़काव करने के मामले देश में पिछलें दिनों सामने आए है। डब्ल्यूएचओ संघटन का कहना है कि गलियों व बाजारो में डिस इन्फेक्टेंट स्प्रे या फ्यूमिगेशन करने से कोई फायदा नहीं है क्योंकि वह धूल व गंदगी की वजह से निष्क्रिय हो जाते हैं। किसी व्यक्ति पर अगर सीधे स्प्रेकर दिया जाए तो उसे गंभीर बीमारियां हो सकती हैं, डब्ल्यूएचओ का कहना है कि मानव शरीर पर डिसइन्फेक्टेंट का स्प्रे नहीं करना चाहिए क्योंकि इससे शारीरिक और मानसिक नुकसान होने की संभावना होती है।

विश्‍व में कौन सा देश डब्‍ल्‍यूएचओ में योगदान

अर्थशास्‍त्र में महारत हासिल ही समझ सकता है कि कौन कितना योगदान डब्‍ल्‍यूएचओ काे करता है। ये पूरा आंकडा 31 मार्च 2020 तक है। जो सरलता से आपको मिल सकता है।

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