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रामराज्‍य की कल्‍पना में, उप्र महिला सुरक्षा

वीमेन हेल्‍पलाइन बन्‍द पिछले एक साल से नहीं मिला है वेतन

सत्‍यम् लाइव, 28 अगस्‍त 2020, दिल्‍ली।। उत्‍तर प्रदेश में मार्च 2017 में योगी आदित्‍यनाथ के रूप में मुख्‍यमंत्री शपथ ग्रहण समारोह समाप्‍त होता हैै और एंटी रोमियो दस्‍ते का गठन किया जाता है। इस योजना के तहत स्‍कूल- कॉलेज जाने वाली लडकियों को छेडखानी से बचाना था। एंटी रोमियो दस्‍ते के साथ ही उत्‍तर प्रदेश की महान पुलिस कर्मी जो अपने योजनाओं में कितनेे अच्‍छा कार्य करते हैं ये किसी से छिपा नहीं है। इस योजना मेें अधिकतर वही लडके और लडकियॉ फॅसते हैं जो अपने सहमति केे साथ-साथ बैठे होते हैं। योजना का सही स्‍वरूप कई बार सामने आये जैसे 30 मार्च 2017 को रामपुर में एक भाई-बहन को थाने ले आते हैं। ये दोनों भाई-बहन गॉव से रामपुर शहर में दवा लेने के लिये आए थे। पूरी जानकारी हो जाने केे बाद भी 5,000 रूपये मॉगने का आरोप पुलिस पर लगा हुआ है। एंटी रोमियो की अकेली घटना नहीं थी ऐसी सभी घटनाओं में सदैव ही पुलिस पर ये आरोप आता है कि गलती हो या न हो पर, जो मेहनत की है पुलिस ने उसका कीमत ली अवश्‍य ही जाती है और चूॅकि पुलिस पर किसी भी योजना पर खर्च किया गया पैसा चाहिए होता है तो उसकी भरपाई बिना अपराध के व्‍यक्ति सेे ही निकाला जाता है वो भी क्‍या करे? इस समाज में उसकी कोई सुनता तो है नहीं तो ”मरता है पर भरता है।” एंटी रोमियो दस्‍ता जून 2019 में मुख्‍यमंत्री द्वारा फिर से सक्रिय किया जाता है और इस बार तो ऐसा लगता है कि जैसे खुला अधिकार दे दिया गया हो कि रोमियो चाहिए ही। इस बार कानपुर, बरेली, प्रयागराज, बनारस, गोरखपुर, लखनऊ जैसे ऐसे कई जोनों में लगभग 11 हजार रोमियों को पकडा जाता है। इस बार तो पहले से ज्‍यादा अति करके उन बच्‍चों को भी उठाया गया जो 10 कदम आगे पीछे हाेकर अपने घर की ओर कदम बढा रहे थे और एक दूसरे को जानते भी नहीं थे। ये आंकडा साफ बताता है कि अगर सही व्‍यक्ति को पकडा गया होता तो 2018 में, यूपी में 59,445 मामले सामने नहीं आते। इसके साथ ही 2018 में लगभग 10 रेप केस प्रतिदिन होते हैं। आपको याद होगा कि एंटी रोमियो में एक वीमेन हेल्‍पलाइन 181 बनाया गया था इस नम्‍बर को 11 जिलों से 75 ज़िलों तक चालू किया गया। हलॉकि आपको बता दें कि इस हेल्‍पलाइन की जिम्‍मेदारी मेमोरेंडम ऑफ़ अंडरस्टेंडिंग के तहत पांच साल तक के लिए एक प्राइवेट कंपनी जीवीके इमर्जेंसी मैनेजमेंट एंड रिसर्च इंस्टिट्यूट को दिया गया। इतना सब कुछ होेते हुए भी महिलाओं पर अपराध कम नहीं होते हैं। 2019 में उन्‍नाव में एक नहीं दाेे बडे बलत्‍कार के केस सामने आते हैंं जिसमें बीजेपी नेता स्‍वयं शामिल होते हैं। ऐसे ही कई केस सामने आ रहे है जिन पर कोई कार्यवाही नहीं होती है क्‍योंकि वो पार्टी के नेता हैं और गरीब के हाथ पैर तोडकर उससे सारा पैसा ऐंठ लिया जाता है। 2019 के बाद 2020 में और ज्‍यादा बढ रहे हैंं इस साल फ़रवरी में विधानसभा में राज्यपाल के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव देते हुए योगी आदित्यनाथ ने कहा था, ”इस देश में रामराज्य ही चाहिए, समाजवाद नहीं चाहिए। हमारी सरकार रामराज्य की अवधारणा को ज़मीन पर उतारने को प्रतिबद्ध है” कितना रामराज्‍य आया है जरा माह के रिकॉर्ड देख लेते हैं

  • 31 जुलाई, 2020 को मुजफ़्फ़रनगर यूपी में एक आठ साल की बच्‍ची का रेप और फिर गला घोंटकर हत्या कर दी गई।
  • 5 अगस्त, 2020 को खुर्जा जिले में 8 साल की एक बच्‍ची का रेप का प्रयास और फिर गला घोंटकर उसकी हत्या कर दी गई जाती है उस बच्‍ची का शव भी गन्ने के खेत से मिलता है।
  • 6 अगस्त, 2020 को हापुड में 6 वर्ष की बच्‍ची को उसके घर के सामने से अगवा कर उसका रेप किया जाता है। खून से लथपथ वो झाड़ियों में पायी जाती है अभी भी उस बच्‍चे का इलाज मेरठ के अस्पताल में चल रहा है।
  • 10 अगस्त, 2020 सुबह औरंगाबाद में, अपने छोटे भाई के साथ मोटरसाइकिल पर जा रही थी जब उसकी मौत हो गई। यह वही सुदीक्षा भाटी लडकी है जो अमेरिका में शिक्षा प्राप्‍त कर रही थी। परिवार का आरोप है कि मोटरसाइकिल सवार दो व्यक्ति भाटी का पीछा कर उसे परेशान कर रहे थे जिसके कारण दुर्घटना हुई।

एंटी रोमियो की असफलता का एक छोटा सा सबूत है और इससे भी बढकर उत्‍तर प्रदेश के हालात ये है कि 24 जुलाई 2020 को योगी सरकार ने वीमेन हेल्‍पलाइन को पुलिस हेल्‍प लाइन के नम्‍बर से जोड दिया गया है अब इस नम्‍बर को इमरजेन्‍सी कॉल के लिये प्रयोग में लिया जायेगा। वीमेन हेल्‍पलाइन से जुडी महिला कर्मचारियों ने भूख हडताल करने को कह दिया है क्‍योंकि पिछले 1 साल से पेमेन्‍ट नहीं मिला है। योगी सरकार ने अश्‍वासन देते हुए पेमेन्‍ट देने का वादा किया है। अर्थात् असफलता के द्वार पर खडी महिला सुरक्षा में रामराज्‍य को मात्र आधार कहना काल्‍पनिक है। एंटी रोमियो की असफलता ही है कि वीमेन हेल्पलाइन बंद कर दी गई।

सुनील शुक्‍ल उपसम्‍‍‍‍‍‍पादक 9717534480

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