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बृषभान भवन से नन्दभवन में आज जाएगा होली का न्यौता

Holi's invitation to be held today at Nandabhavan from Brihrabhan Bhavan
Holi's invitation to be held today at Nandabhavan from Brihrabhan Bhavan

लाडली जी मन्दिर में पांडे लीला व लड्डू होली आज

वृन्दावन की रंगीली संखी जाएगी होली का न्यौता लेकर

बरसाना। कहते है कि ब्रज बरसाने की होली पूरी संसार से अलौकिक व दिव्य है। जहां हुरियारिनां की प्रेमभरी लाठियां हुरियारे सहज हंसते हुए झेल जाते है। आज बृषभान भवन से संखी नन्दभवन में होली का न्यौता देने जाएगी। होली का न्यौती स्वीकार करने के लिए शाम को पंडा बृषभान भवन में आयेगा।


प्रसिद्ध लठामार रंगीली होली से एक दिन पहले यानी आज लाडली जी मन्दिर पर लड्डू होली व पांडा लीला का आयोजन किया जाएगा। इस दौरान प्राचीन परंपरा के अनुसार आज बृषभान भवन से वृन्दावन की रहने वाली रंगीली संखी सुबह होली का न्यौता देने के लिए नन्दगांव जाएगी। रंगीली संखी होली का न्यौता करीब 5 साल से दे रही है, उससे पहले उसके गुरु श्यामादासी होली का न्यौता देने के लिए जाया करती थी। रंगीली संखी अपने साथ एक हांडी में गुलाल, पान बीड़ा, खीरसा, इत्र, फुलेल आदि भोग प्रसाद लेकर नन्दभवन में जाकर माखन चोर कन्हैया से राधा का न्यौता देती है कि पूरे ग्वाल-बाल मंडली साथ बरसाने में होली खेलने को बलायौ है। बरसाने होली का न्यौता पाकर कृष्ण व उसके सखा खुशी के मारे पागल हो जाते है। होली का न्यौता स्वीकार करने के बाद नन्दभवन से एक पांडा कृष्ण का संदेश लेकर बृषभान भवन में आता है और संखियों से कहता है कि नन्दलाल अपने संखाओं के साथ होली खेलने के लिए कल बरसाने आ रहे है। कन्हैया के संदेश को पाकर संखियां पांडै को लड्डू खिलाती है। पांडा लड्डू खाकर खुशी से पागल हो जाती और खुद खाता तथा लुटाता है। इसी दौरान मन्दिर परिसर में लड्डूओं की बर्षा के साथ अबीर गुलाल तथा रंग शुरु हो जाता है। श्रद्धालु इस लड्डूओं की होली में रंग रंगन को आतुर नजर आता है। इस मौके पर मन्दिर परिसर में करीब 30 क्वंटल बूंदी के लड्डू लुटाय जाते है।

अब नहीं आता नन्दगांव का पांडा
परंपरा के अनुसार कान्हा की ओर से होली की स्वीकृति का संदेशा लाने वाला पांडा आज से करीब सौ साल पहले तक नन्दगांव से आया करता था। लेकिन अब नन्दगांव से काई पांडा बरसाना नहीं आता है इस लीला को बरसाने के ही गोस्वामी सेवायत करते आ रहे है। बुजुर्गो के अनुसार एक बार मध्य प्रदेश के रीवा रियासत के महाराजा लड्डू होली देखने के लिए आये थे। इस दौरान मन्दिर परिसर में पांडे का नृत्य देखकर महाराजा इतने भाव विभोर हो गए कि उन्होंने अपने समस्त राजसी जेवर पांडा को भेंट कर दिये। लेकिन इतने पर भी राजा का मन नहीं भरा और उन्होंने सोने के इतने सिक्के पांडा को भेंट किए कि पांडा उन्हें उठा तक नही सका। अगली बार फिर से आने का प्रण कर राजा लोट गए। बरसाना मन्दिर कास पुजारी इस धन बर्षा से इतना चमत्कृत हुआ कि अगली साल से उसने नन्दगांव के पांडा को बुलाने के बजाय स्वंय पांडा का वेश धर नाचना शुरु कर दिया, लेकिन पुजारी के दुर्भाग्य से रीवा के महाराजा कभी होली देखने न आ सके और नन्दगांव से पांडा आने की परंपरा भी वहीं समाप्त हो गई। तब से श्रीजी मन्दिर में सेवायत ही पांडा का वेशधर इस लीला को करते आ रहा है।

नन्दगांव के हुरियारों के स्वागत को तैयार बरसाना
लठामार होली में हुरियारिन बनने का सौभाग्य भले ही कस्बे के ब्राह्मण समाज की महिलाओं को ही मिलता है, लेकिन होली के दौरान आन्नद उठाने से काई नही चुकता है। कस्बे के हर वर्ग के लोग इस पर्व पर अपनी सहभागिता करते है। कस्बे के विभिन्न मौहल्लों में लठामार होली के दिन निकाली जाने वाली चौपाई के लिए लोगो का उत्साह देखते ही बन रहा है। युवा बुजुर्गो से चौपाई गायन सीख रहे है। लठामार होली पर हुरियारों के स्वागत के लिए कस्बे के हर मौहल्ला में से चौपाई निकाली जाती है। इस दौरान लठामार होली खेलने आने वाले हुरियारों को सर्वप्रथम प्रिया कुण्ड पर भांग व ठंडाई देकर उनका स्वागत स्तकार किया जाता है। जिसके बाद हुरियारे श्रीजी मन्दिर पर जाकर होली के पद गाते हुए नाचते है।

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लठामार होली की द्वितीय चौपाई आज निलेंगी
बरसाना। प्रसिद्ध लठामार होली की द्वितीस चौपाई आज यानी लड्डू होली के दिन शाम को धूमधाम से निकाली जाएगी। यह चौपाई राधारानी मन्दिर से रंगेश्वर महादेव तक निकाली जाएगी। चौपाई में गोस्वामीजन होली के पद गाते व नाचते हुए चलते है। इस दौरान अबीर गुलाल की बर्षा से वातावरण रंगीन हो जाता है श्रद्धालु भी इस रंगीन वातावरण में रंगन को अतुर नजर आते है।

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