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होली, दिवाली पर ही बढता है प्रदूषण?

सत्‍यम् लाइव, 13 नवम्‍बर, 2020, दिल्‍ली।। कोरोना काल का संकट समाप्‍त होने से पहले डेंंगूू मच्‍छर आ जाता है फिर केन्‍द्र सरकार तथा सभी राज्‍य की सरकारें उसका प्रचार करती हैं डेंगू से जनता की बचाने के लिये अपनी पीठ थपथपाती हुई सरकारें, इसके बाद प्रदूूूूूूषण बढने पर काम करने लगती हैं और साथ ही सरकारों की ऊॅगली पर नाचने वाला मीडिया प्रदूषण पर शोर मचाने लगता है। पिछले वायरस 15-20 साल से वायरस की हिम्‍मत इतनी बढ गयी हैं कि भारत के सूर्य देव द्वारा छोडे गये सौर कोरोना के सामने खडा होकर, सरकार से अपना प्रचार खूब करवा रहा है। वो भी विशेष तौर पर जब दीपावली आती है या फिर जब होली आती है। इस बार तो सारे रिकार्ड तोडकर कोरोना के साथ पाकिस्‍तान से उडकर टिड्डा ज्‍येष्‍ठ के माह में आ पहुॅचा। जबकि ज्‍येष्‍ठ का मास वाेे मास है जिसमें सूर्य के ताप के कारण इन्‍सान का धूप में दस कदम चल पाना मुश्किल होता है उस तापमान पर सोशल मीडिया ने भी टिड्डा उडता चला आ रहा था। अब दीपावली आ गयी तो प्रदूषण किसानों की पराली जलाने के कारण आ गया है। यूपी, बिहार, राजस्थान, मध्य प्रदेश और हरियाणा समेत देश के कई राज्यों में वायु प्रदूषण तेजी से बढ़ने की खबर  आ रही है। साथ ही ये भी कह रहे हैं कि दीवाली से पहले दिल्‍ली सहित एनसीआर में प्रदूषण के स्‍तर में कुछ कमी देखने को मिली है। वैज्ञानिक ने वायु प्रदूषण पर बारिश कम होने की बात कही है जबकि प्रदूषण वहॉ भी बढ रहा है जहॉ पर बारिश से बाढ आयी थी। कुल मिलाकर पटाखे जलाने पर अब प्रदूषण बढने का खतरा बताते हुए पटाखों पर प्रतिबन्‍ध लगा दिया है जबकि 25 दिसम्‍बर से लेकर पश्चिमी नववर्ष पर पूरा विश्‍व पटाखे बजा रहा होता है तब प्रदूूूूूूषण कहीं नहीं बढता है। अमीरों के एसी में बैठने से प्रदूषण नहीं बढता है पिछले 10 सालों से यूवी लेजर मशीन जैसी कई मशीनें भारत में लगाई गयी हैं उन से भी प्रदूषण नहीं निकलता है कुल मिलाकर ये विदेशी अपनी परम्‍परा भारत में स्‍थापित कर रहे हैं और भारत के सभी त्‍यौहारों को भारत के नेता ही अवैज्ञानिक बता रहे हैं जबकि श्रीराम दिखावे के भक्‍तों के हाथ में इस समय सरकार है और भारतीयता के आधार पर ही वोट मिला है फिर भी भारत में विज्ञान आज तक नहीं रहा ये बताने वाले इस कलयुगी ज्ञानी कम नहीं हैं। सिर्फ अपना नाम अमर करने के चक्‍कर मेंं इतनी बडी गलती करते चले जा रहे हैं जिसका भुगतान कई पीढियों को करना पडेगा।                                                    .. सुनील शुक्‍ल

 

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