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मधुमेह की रसोई चिकित्सा

सत्यम् लाइव, 9 अप्रैल 2021, दिल्ली।। पाचन क्रिया के ठीक न होने के कारण मानव शरीर में 85 प्रतिशत रोग का जन्म होता है। भोजन को पचाने के लिये शरीर में आमाशय, पित्ताशय, पक्वाशय ग्रन्थियाँ हैं कुछ रसों का निर्माण हमारा शरीर करता है जिसे साधारण भाषा में लार, आमाशीय रस, पित्त रस, आँतों में आँत्र रस तथा अग्न्याशय में अग्न्याशीय रस बनता है। इन्हीं रसों के साथ मिलकर भोजन पचकर पाचक रस का निर्माण करता है यही पाचक रस ऊर्जा के रूप में, एक एक कोशिका में रक्त का संचार कराता है।

एक भी रस यदि बिगड़ जाये तो पाचन दोष पूर्ण होने लगता है और नये रोग अपच, अम्लता, गैस, कब्ज, कोलेस्ट्राॅल, भूख न लगना, दस्त आना, मोटापा और मधुमेह होने लगते हैं। अग्नाशय से इन्सुलिन नामक स्राव निकलता है शरीर में शुगर के संतुलन बनाये रखने के लिये अग्नाशय की कार्यरत रहता है और प्राप्त इन्सुलिन ही है जो रक्त की कोशिकाओं में प्रवेश दिलाती है जिससे शरीर को कुछ ऊर्जा प्राप्त होती है।

मधुमेह के लक्षणः- कमजोरी, थकान, पैरों में जलन होना, फोड़े-फुन्सी ठीक न होना, कोलेस्ट्राॅल (मोटापा) का बढ़ना, बार-बार पेशाब आना।
मधुमेह के कारणः- तनाव होना, गरिष्ठ भोजन करना, मुख्य कारण असमय भोजन करना है जिसके कारण पाचन क्रिया खराब हो जाती है और पेट पूर्णरूप से साफ नहीं हो पाता है। एक मुख्य कारण चीनी भी हैं क्योंकि शुगर लेबल यही बढ़ाती है।
योगाभ्यासः- अनुलोम-विलोम, अग्निसार, कपालभाँति, भस्त्रिका, भ्रामरी प्राणायम साथ ही तनाव मुक्त जीवन के लिये ध्यान योग अवश्य करें।

भोजनः– प्रातः खीरा, करेला, टमाटर का रस, चैलाई, पालक, मूली, ककड़ी, लौकी, तरोई, टिण्डा आदि का रस या उबली सब्जी या कम मसाले युक्त सब्जी खायें। मिक्स गेहूँ, जौं, चने की रोटी या चोकर सहित आटे की रोटी खायें। दोपहर तक भर पेट अमरूद, जामुन, सन्तरा, ऑवला, सेब ले सकते हैं। सायं काल को भरपेट हल्के भोजन के बाद कम से कम 1000 कदम अवश्य चलें। भूख न लगने पर भुने चले खायें। रिफाइन्ड का प्रयोग हद्धय घात तक देता है अतः ऋतु के अनुसार तेल का प्रयोग रोगों से बचाता है।

नोट:- मात्र पाचन क्रिया को ठीक करने मात्र से मधुमेह पूर्ण रूप से स्वस्थ हो सकती है। भोजन के पश्चात् यदि आपको मूत्र के लिये जाना पड़ता है तो समझे कि आपके शरीर का रक्तचाप नहीं बढ़ने वाला है इससे कई रोग आपके शरीर में नहीं आयेगें।
भोजन करने के 90 मिनट बाद ही पानी पीने का विधान आयुर्वेद में बताया गया है इससे भोजन पचने की प्रक्रिया ठीक होती है।
पाचन के लिये मूली का प्रयोग अवश्य करें।
प्रातःकाल खाली पेट बेल पत्ते का रस और करैले का रस ले सकते हैं।
जामुन की गुठली का चूर्ण + सौंठ + गुड़सार बुटी को बराबर मात्रा में लेकर शहद के साथ ले सकते हैं।
त्रिफला हरड़ 100 ग्राम, बहेड़ा 200 ग्राम और ऑवला 300 ग्राम को पिसकर रात्रि में सोने से पहले देशी गाय के दूध के साथ या फिर गुनगुने पानी के साथ लेने से कब्जियत ठीक होती है।
चैत्र के मास में तो रामबाण है नीम की दातून या कोमल पत्ती प्रातःकाल चबायें।

सुनील शुक्ल

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