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घरेलू पेय पदार्थ बनाना प्रबला का कार्य है।

सत्‍यम् लाइव, कानपुर:

धर्म और स्‍वस्‍थ की रक्षा हेतु भारत की ग्रहणी सदैव ही स्‍वयं घर केे निर्मित भोज्‍य और पेय पदार्थ खाना तथा मेहमान को खिलाना अपना सम्‍मान समझती रही है। भारतीय संस्‍कृृ‍ति की ”अतिथि देवोभव” जैसी परम्‍परा अब समाप्‍त सी होती जा रही है। ये कहने की आवश्‍यकता नहीं है कि पूूूरेे विश्‍व में भारत ही एक मात्र ऐसा देश है जो जहाॅॅ की नारी को जबरदस्‍ती अबला बनाया गया है। भारतीय नारी अबला तभी हो सकती है जब वो अपनी रसोई में दो मिनट में के चक्‍कर मेें पडकर अपने परिवार केे हर व्‍यक्ति की सारी पोषकता का नाश कर देती है। भारतीय नारी अगर अपनी रसोई से सप्‍तरस केे निर्माण को जानती है तो बडी से बडी बीमारी से निपटना भी जानती है और ऐसी ही नारी को प्रबला कहा जाता है। अब नवरा‍त्रि व्रत पेय पदार्थ अर्थात् जूस की ही बात करेें तो बता देंं कि जूस को प्रात: जी पीना चाहिए। ऋतु केे अनुुुुसार जूूूस किसी भी प्रकार से नशेे से छुटकारा दिलाता है। मीठी करने के लि‍ये स्‍टीविया अर्थात् मीठी तुलसी या धागे वाली मिश्री का ही प्रयोग करना चाहिए।

सौंफ का शर्बत: एक चम्‍मच पिसी खाने वाली सौंफ तथा एक चम्‍मच धागे वाली मिश्री मिलाकर, एक गिलास पानी में मिला लें तथा छानकर मेहमान को पिलायें।

पंचक शर्बत: ४-४ ग्राम जीरा, सौंफ, काली द्राक्ष, धनिया और धागे वाली मिश्री को पिसकर रख लें। २०० मिली. पानी में मिलायें तथा छानकर पीयें।

आंवला शर्बत: एक गिलास पानी में एक चम्‍मच आंवला का रस तथा तीन चम्‍मच धागे वाली पिसी मिश्री डालकर मिलाकर बने रस को आंवला रस कहलाता है।

नींबू की शिकंजी: एक गिलास पानी में एक नींबू का रस साथ मेें धागे वाली मिश्री तथा चुटकी भर सेंधा नमक मिलाकर छानकर ही पियें क्‍योंकि नींबू बहुत फायदे मन्‍द है परन्‍तु उसका बीज उतना ही नुकसानदायक है।

छाछ: १०० ग्राम दही में ४०० ग्राम पानी मिलाकर साथ ही अजवाइन तथा काला नमक मिलाकर दोपहर में पीने से भूख लगती है। यह पेय पदार्थ अति-उपयोगी है।

सौंठ जल: ४ गिलास पानी केा पतीले में डालकर एक साबूत सौंठ का टुुुुुकडा या २ से ४ ग्राम सौंठ डालकर पानी गर्म करें जब अच्‍छी तरह उबालकर ३ गिलास पानी शेष रह जाने पर ठंडा करके छानकर पीयें।

मूॅग का सूप: वैसे तो मॅूग का पानी हर बच्‍चे के लिये अति उपयोगी है। ५० ग्राम साबूत मॅूग मेें १.५ लीटर पानी में काली मिर्च, हरा धनिया, अदरक, सूखा धनिया व हल्‍दी डालकर तब तक पकायें जब तक पानी आधा न रह जाये।

जौ का सूप: जौ का सत्‍तू के बारे में तो आप जानते ही हो। ५० ग्राम जौ को, धागे वाली मिश्री डालकर, एक लीटर पानी में पकायें। जौं बराबर पक जायें तब उतारकर छन्‍नी से छानकर अपने परिवारको पिलायें।

लौकी रस: लौकी रस तो अद्र्भूत है वो वात का सबसे खतरनाक रोग हदय के व्‍लॉक को समाप्‍त कर देती है बस उसमेें तुलसी पत्‍ती, पुदिना पत्‍ती, स्‍वादानुसार काला नमक मिला सकते हैं।

पना: कच्‍चे आम अर्थात् अम्बिया को पानी में डालकर उबाल लें फिर उसका रस निकाल कर पुदीना, धनिया, हरि मिर्च के बीज तथा स्‍वादानुसार काला नमक मिलाकर तैयार करे। ये पना डायरिया या कालरा या लू लगने से बचाता हैैै। इसे ही पना, पन्‍ना या सन्‍नाटा भी कहा जाता है।

आम रस: आंवले के अलावा कोई भी फल दूध के साथ नहीं लिया जाता हैै परन्‍तु आम एक ऐसा फल है जो दूध में डालकर पिया जा सकता है उसमें भी ये शर्त है कि आम मीठा ही होना चाहिए खट्टा होने पर आम दूध के साथ नहीं लिया जा सकता है। आवश्‍यकता होने पर चीनी की जगह धागे वाली मिश्री मिला सकते हैं। …………. सुनील शुक्‍ल उपसम्‍पादक

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