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ज्योतिष एक गणित है जिसका ज्ञान जाति नहीं देखती ….ज्योतिषाचार्य हबीब

सत्यम् लाइव, 16 सितम्बर 2021, उत्तर प्रदेश।। जब भी ज्योतिष की बात होती है तो हमारे जहन में जो चित्र उभरता है वो किसी पण्डित के रूप में होता है। आज के समाज को वैज्ञानिकता का आधार देते हुए अन्धविश्वास भी इसी विद्या को घोषित कर रखा है परन्तु जब सत्यता की खोज में निकले तो ज्ञात हुआ कि वैदिक गणित का आधार है ये। साथ ही शास्त्रों में ग्रहों की गणना को संस्कार कहा गया है। गणितज्ञ आर्यभट्ट जी ने भी इसी गणना को संस्कार कहा है। इस विद्या के गणितज्ञ आज भी धरा पर हैं इसी विद्या को वैदिक गणित भी कहा जाता है। इस गणित का ज्ञान युगों से हिन्दु और मुस्लिम दोनों को था।

आज के समय में भी ऐसे कई विद्वान है जो इस विद्या को जाति-पाति भूलाकर इस पथ पर बढ़ रहे है। उनसे बात करने पर हमें यह पता चलता है की यह विद्या पूर्ण रूप से गणित पर आधारित है। ज्योतिष विद्या के ऐसे कई जानकार हमारे देश में है जो ग्रहों के आधार पर गणना करते है। उन्हीं में से एक नाम है आचार्य हबीब जी का, जो मूल्यतया हाप्पुड़ रोड़ गांव विजौली के निवासी है। आचार्य हबीब इस कार्य को पिछले 40 सालों से लगातार कर रहे है। उनके पास लगभग सभी समुदाय लोग अपनी कुंडली बनवाने व दिखाने के लिए आते है। आचार्य जी बताते हैं कि शुरूआत में कुंडली के लिए सिर्फ सनातन भाई ही आते थे लेकिन अब मेरे पास कुंडली के मुस्लिम समुदाय के लोग भी मेरे से मुलाकात करते है। आपके सामने आचार्य हबीब जी से हुई एक छोटी सी मुलाकात का अंश प्रस्तुत कर रहे हैं-

प्रश्न नम्बर 1. ज्योतिष शास्त्र क्या है?
उत्तरः सामान्य रूप से ज्योतिष शास्त्र भविष्य कथन कि पद्धति मानता है। परन्तु ये वेदों की आँखे हैं इसके आधार पर हमारे समाज में बहुत सारे कार्य इसके माध्यम से किए जाते है और प्रकृति को समझने में भी ज्योतिष का बहुत बड़ा महत्व है जैसे ग्रहण होने पर भी इसकी गणना करके तिथि, स्थिति और समय निकालते है और ये सब ग्रह नक्षत्रों पर आधारित होता है। जैसे बहुत से लोग कहते है कि ये लूटने वाली विद्या है ऐसा कुछ भी नहीं इसमें और यह किसी भी विशेष धर्म के मुख्य देव की ओर इंगित नहीं करता है। यह सबके लिए बराबर है क्योंकि यह पूर्ण रूप से गणित पर आधारित है जिसमें ग्रहों कि गणना है चाँद-तारों की गतियाँ है उन गतियो के आधार पर ही मौसम की जानकारी दी जाती है। जीव, जंतु, वनस्पति के बारे में जानकारी देता है। किसी भी प्रकार कि घटना घटेगी या घटने वाली होती है उसमें मनुष्य मात्र के लिए या प्रकृति मात्र के लिए बहुत ही सहयोगी हो जाता है। जब इसका अच्छे रूप में प्रयोग होता है तो संसार को सुख प्रदान करने में भी यही विद्या काम में आती है।

प्रश्न नं. 2. आपका झुकाव इस विद्या की तरफ कैसे हुआ?
जवाबः दरअसल इसमें झुकाव मेरा कुछ भी नहीं है। अगर हम बात करें जैसे कि जाति वर्ण बनाये गये थे कि जैसे दर्जी कपड़े सीने का काम करेगा। पंडित का बेटा आगे जाकर पोथी-पत्रा या हवन आदि कराकर ही गुजर करेगा। ऐसी पहले से ही प्रथा रही है मेरे परिवार में ये ज्योतिष रहा है पहले से ही। तो मैं भी बचपन से ही बनाना सीख गया। जब कम्प्युटर नहीं था तब पत्रा हाथ से ही बनाया जाता था इसी कारण से मैं हाथ से पत्रा बना लेता हूँ। कम्प्यूटर होने के बाद भी आज भी लोग मुझसे हाथ से पत्रा बनवाने आते हैं और मैं हाथ से पत्रा बनवाकर उन्हें देता हूँ।

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प्रश्न नं. 3. इस विद्या की तरफ मुस्लिम समुदाय के द्वारा झुकाव अब न के बराबर है। आपकी क्या राय है इस बारे में?
जवाबः दरअसल जब जिस व्यक्ति को गणित से प्यार होता है वो सम्प्रदाय को अलग रख देता है उसका सम्बन्ध गुणा, भाग से जुड़ जाता है। जब वो इस गणित के कार्य को करने लगता है तो उसे ये पता नहीं होता है कि मैं हिन्दु हूँ या मुस्लिम हूँ। और इस विद्या को किसी सम्प्रदाय विशेष से जुड़ते हैं तो ये इस भारतीय गणित के साथ अन्याय होगा क्योंकि आकाश मण्डल में जो नक्षत्र हैं, राशियाँ हैं, इनके जो स्थान है वो हर वस्तु को प्रभावित करते हैं। भले ही वो निर्जीव हो या सजीव हो। उदाहरण के तौर पर समझते हैं कि निर्जीव वस्तुओं की भी एक सीमा है। मान लो हमारे पास यह एक पेन है तो इसकी भी आयु बनते समय तय हो जाती है। एक साथ हजारों पेन बनते है कुछ बनते ही खराब हो जाते हैं तो बहुत से ऐसे भी होते हैं जो किसी को फाँसी की सजा बोलते है उसमें से कुछ किसी को राजयोगी बना देते है। तो जो ज्योतिष के अन्दर गणना करते हैं जो उसमें ये आता है कि इस क्षण, इन परिस्थितियों में ऐसी सम्भावनाऐं हैं क्योंकि प्रकृति अर्थात् ईश्वर शक्ति जो ब्रह्माण्ड को चलाने वाली शक्ति है उसको संसार में कोई समझ नहीं सकता और मुख्य रूप से समझना भी नहीं चाहिए क्योंकि जिसकी सीमा न हो शुभ-अशुभ करने की, उसके बारे हम सब क्या खोज लेगें? फिर भी अपने अपने पंथ के अनुसार हम सब खोजते ही रहते हैं। इसमें यदि ज्योतिष गणित का सहारा लेकर खोजते हैं तो थोड़ा सा सरल हो जाता है। तीन विद्याऐं ही हैं पहली तो इसमें गणित ही है। एक सूर्य उदय से दूसरे सूर्य उदय के बीच में नक्षत्रों के आधार पर सुख-दुःख को देखते हैं या दुनिया में क्या हो रहा है? वो सब बताते हैं। कभी कभी गणनाएँ गलत भी हो जाती है लेकिन इससे ये सिद्ध नहीं होता है कि ये अन्धविश्वास जैसी विद्या है। ये गणित के आधार पर एक सच्ची विद्या है। यदि पूछने वाला या बताने वाला इस अध्यात्म विज्ञान से थोड़ा सा जानकारी रखता है तो ये दोनों के लिये ही लाभकारी विद्या है।

क्रमश ……………..

मंसूर आलम

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