Trending News
prev next

अब आ पहुॅचा, डेंगु का खतरा

डेेंगू आये या चिकनगुनिया अब घबराओ नहीं। किसी भी वायरस से आपकी रक्षा सदैव सूर्य करता रहा हैै और सदैव करता रहेगा। अपनी गर्मी से भारत का सूर्य 27 दिनों के बाद बडे से बडे वायरस को समाप्‍त कर देने में सझम है ये बात आपने भारत के भूतपूर्व वैज्ञानिक तथा महर्षि राजीव दीक्षित के मुख से सुनी होगी। इसी कारण से देवता भी इस धरा पर जन्‍म लेने को तरसते हैं।

सत्‍यम् लाइव, 24 जून 2020, दिल्‍ली।। बरसात के मौसम में पानी में कीटाणु आ जाते ही हैै ये तो आयुर्वेद प्रमाणित है ऐसी दशा में भी यदि अपने शरीर की अन्‍दरूनी शक्ति को बढाकर रखा जाये तो जो भी कीटाणु केे कारण संक्रमण प्रकृति में फैलता है वो बरसात के समाप्‍त होते ही, अगस्‍त तारा के उदय होते ही, सूर्य उसे अपने गर्मी से मार देता है इस ऋ‍तु की सबसे बडे कमी ये होती है कि इस ऋतु मेें व्‍यक्ति को भूख नहीं लगती है और इस ऋतु के लिये आयुर्वेद कहता है कि पानी युक्‍त सब्‍जी को सोच समझकर ही खायें, साथ ही बरसात हो जाने के कारण पानी में भी कीटाणु उत्‍पन्‍न हो जाता है और पानी के माध्‍यम से शरीर में प्रवेश कर जाता है अत: पानी को उबालकर ही पियें। पानी के कारण ही बचपन से ये ही इस ऋतु में लोगों को कालरा हो गया सुनता चला आ रहा हॅॅू जो अब टायफाइड में बदल गया है। टायफाइड संक्रमण युक्‍त पानी शरीर में जाने से ही होती है अत: पानी से अपनी सुरक्षा पहले बढायें। अब आज की बात करें तो नया नाम कुछ सालों से डेंगू मच्‍छर आ जाता है इस ऋतु मेें मच्‍छर होते ही है और उससे कालरा नामक बीमारी ही कही जाती रही हैं परन्‍तु आज शब्‍दों में भी विकास हुआ है। ये खतरा जिसे डेंगू के नाम ये कहा जाने लगा है वो जुलाई से अक्‍टूबर तक फैलता ही है। इस चौ-मासे मेंं सबसे ज्‍यादा रोग उत्‍पन्‍न होते ही हैं ये भारत केे शास्‍त्र प्रमाणित करते रहें हैं। डेेंगू आये या चिकनगुनिया अब घबराओ नहीं। किसी भी वायरस से आपकी रक्षा सदैव सूर्य करता रहा हैै और सदैव करता रहेगा। अपनी गर्मी से भारत का सूर्य 27 दिनों के बाद बडे से बडे वायरस को समाप्‍त कर देने में सझम है ये बात आपने भारत के भूतपूर्व वैज्ञानिक तथा महर्षि राजीव दीक्षित के मुख से सुनी होगी। इसी कारण से देवता भी इस धरा पर जन्‍म लेने को तरसते हैं।

डेंगू की बातें हवा मेें नहीं कर रहा हॅॅूॅू मुम्‍बई, बिहार और उत्‍तरांचल में मिल चुके हैं डेंगू केे मरीज। स्‍वास्‍थ्‍य मंत्रालय ने भी सतर्क रहने को कह दिया है साथ ही। पिथौरागढ केे डीएम ने तो डेंंगू से बचाव के लिये रथ यात्रा निकाली है। जिस मच्छर के काटने से डेंगू होता है, वो मादा मच्छर एडीज मच्छर है। डेंगू का मच्छर दिन में, खासकर सुबह के वक्त ही काटता है इसलिए सुबह और दिन के वक्त इन मच्छरों का ज्यादा ध्यान रखें। एडीज इजिप्टी मच्छर बहुत ऊंचाई तक नहीं उड़ पाता। इंसान के घुटने के नीचे तक ही पहुंच होती है इसलिए शरीर को पूरा ढकने वाले कपड़े पहनें ताकि मच्छर से बच सके। सुबह के वक्त पांवों को पूरा ढककर रखें। डेंगू के मच्छर गंदी नालियों में पनपते हैं, शहरी इलाकों में रहने वाले लोगों को इसका ज्यादा खतरा रहता है। लक्षण:- मच्छरों की करीब 3 हजार 500 प्रजातियां मेें मात्र 6 प्रतिशत प्रजातियों केे मादा मच्‍छर इंसानों का खून पीती हैं उसी में ये एडीस मच्छर है जिसके काटने पर करीब 3 दिनों के बाद, बुखार आता है फिर शरीर के जोडो मेें दर्द प्रारम्‍भ होता है यही मच्‍छर है जो चिकनगुनिया या डेंगू रोग पैदा करता है।

इलाज:- पहले तो कोई भी वायरस आपकेे शरीर मेंं तब जीवित नहीं रह पाता है जब आप शुद्ध एवं शाकाहारी भोजन करके अपने शरीर की अन्‍दरूनी शक्ति को बढाये रखते हैं। ऐसा आपने हर आयुर्वेद केे जानकार से सुना होगा और अगर पहुॅच भी जायेे तो वो शरीर का समताप उसको समाप्‍त कर देता है और शरीर के ताप को बढने नहीं देता है। फिर भी किसी कारण से आपको ये वायरस पकड भी लेता है तो उपाय बडा सरल है। सुबह फ्रेश होने के बाद, सबसे पहले 2 ढक्‍कन गौ अर्क पियो, फिर 1 घन्‍टे केे बाद पपीता के अन्‍दर जो सफेद सा जो दिखता है उसके साथ में खाना है और फिर औषधि जो घर में बनाई गयी हो उसमें

इस दवा की तीन खुराक से ही पूरे शरीर का वायरस मर जाता है क्‍योंकि इस वायरस की आदत होती है कि ये पूरे शरीर में घूमता रहता है और यदि आप ये चाहते हो कि ये मच्‍छर हमारे घर में प्रवेश न करे तो सुबह-शाम दोनों समय अपने घर में देशी गाय के गोबर से बना कण्‍डा जलाकर धुंआ करे उसमें यदि देशी घी भी डाल देगें तो अवश्‍य ही ऑक्‍सीजन की मात्रा घर में बढेगी और कोई भी मच्‍छर घर में प्रवेश कर नहीं पायेगा।

किसी भी बीमारी से बचने का उपाय यदि आपके पास है तो अवश्‍य सुझायें। भारतीय किसान गौरक्षा दल पर 97175 34480 पर भेज सकते हैं। लेख हिन्‍दी में ही होना चाहिए।

उपसम्‍पादक सुनील शुक्‍ल

विज्ञापन

अन्य ख़बरे

Be the first to comment

Leave a Reply

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.