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रेलवे हाॅकरों की लड़ाई को मिला ऑल इंडिया रेलवे मेन्स फेडरेशन का समर्थन

All India Railway Men's Federation support for the battle of railway hawkers

दिल्ली: ऑल इंडिया रेलवे मेन्स फेडरेशन ने देश भर के रेलवे से जुड़े हाॅकरों की समस्याओं के समाधान के लिए खान-पान नीति में बदलाव को लेकर अखिल भारतीय खान-पान लाइसेन्सीज वेलफेयर एसोसियेशन की मांगों का समर्थन किया है। देश के इस सबसे बड़े फेडरेशन ने हाॅकरों के संघर्ष को आगे बढ़ाते हुए रेलवे बोर्ड के चेयरमैन को एक पत्र भी लिखा है।

फेडरेशन के महामंत्री शिवगोपाल मिश्रा ने रेलवे बोर्ड के चेयरमैन को लिखे पत्र में कहा है कि 2017 में लागू की गयी रेलवे की खान-पान नीति भेदभावपूर्ण है। इसकी वजह से पुराने, गरीब व आर्थिक रूप से कमजोर रेलवे खान-पान सेवा से जुड़े स्टाॅल, ट्राॅली और खोमचेवालों की रोजी-रोटी मारी जा रही है। उन्होंने चेयरमैन से मांग की है कि इन गरीबों की समस्या को देखते हुए वह मामले में हस्तक्षेप करें और यह सुनिश्चित करें कि रेलवे बोर्ड की तरफ से जारी किये गये 27 फरवरी, 2017 तथा 15 मार्च, 2017 के काॅमर्शियल सर्कुलर संख्या 22 व 20 को वापस लिया जाय। साथ ही उन्होंने यह भी मांग की है कि पुराने लाइसेंसों को जारी रखा जाये, जिससे कि लाखों लाइसेंसधारकों और वेंडरों तथा उनके परिजनों की जीवनचर्या का संचालन सुचारु रूप सुनिश्चित किया जा सके।

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रेलवे बोर्ड के चेयरमैन को पत्र लिखने के लिये शिवगोपाल मिश्रा का आभार व्यक्त करते हुए अखिल भारतीय रेलवे खान-पान लाइसेंसीज वेलफेयर एसोसियेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष रवींद्र गुप्ता ने कहा कि बड़ी कंपनियों के लिये रेलवे ने 2017 में एक मल्टीपरपज स्टाॅल पाॅलिसी बनायी थी। 12 मार्च, 2019 को रेलवे बोर्ड ने इस पाॅलिसी में बदलाव करते हुए एक सर्कुलर जारी किया, जिसमें यह प्रावधान है कि भारतीय रेलवे में बुक स्टाॅल, केमिस्ट और विविध वस्तुओं के स्टालों इत्यादि के ठेकदारों की सभी इकाइयों का पुनर्नवीनीकरण किया जायेगा और वे पहले की तरह अपना काम सुचारु रूप से करते रहेंगे। उन्होंने इसे भेदभावपूर्ण करार देते हुए मांग की कि इसके दायरे में खान-पान लाइसेंसधारकों को भी लाया जाय, जिससे कि उनके हितों को सुरक्षित किया जा सके। ऐसा करने से भेदभाव भी समाप्त हो जायेगा।

रेलवे खान-पान लाइसेंसधारकों की कई अन्य ज्वलंत समस्याओं के बारे में विस्तार से बताते हुए रवींद्र गुप्ता ने कहा कि यह लड़ाई हम पिछले लगभग डेढ़ दशक से लड़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि हमें अपनी मांगों पर रेलवे की तरफ से जवाब का इंतजार है। उन्होंने साथ ही चेतावनी दी कि अगर उनकी मांगों को नहीं माना गया तो आगामी जून महीने में प्रस्तावित राष्ट्रीय परिषद् की बैठक में आंदोलन की रणनीति तय की जायेगी।

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