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बढती बेरोजगारी पर एक नजर

सत्‍यम् लाइव, 6 सितम्‍बर 2020, दिल्‍ली।। चरमराती अर्थव्‍यवस्‍था ने भारत में करोडों लोगों को बेरोजगार बनाया है और अभी जो दशा दिख रही है उससे तो साफ दिखाई दे रहा है कि करोडो लोग अभी बेरोजगार होने जा रहे हैं उसका कारण कुछ भी हो परन्‍तु स्‍पष्‍ट नजर आ रहा है कि बढती हुई ऑनलाइन व्‍यवस्‍था से कई लोगों केे हाथ से काम छिन जायेगा। दूसरी तरफ बीते हफ्ते इन सब को लेकर प्रधानमंत्री कार्यलय में महत्वपूर्ण बैठक हुई इसके बाद इस प्रस्ताव को कैबिनेट के पास भेज दिया गया है। जिन कंपनियों के पास बड़ी मात्रा में ज़मीने पड़ी है साथ ही, प्लांट और मशीनरी को बेचने के लिए सरकार ने नया प्लान तैयार किया है। इसके लिये प्रस्‍ताव पारित होने जा रहे हैं जमीन बेचने का एक भूमि मैनेजमेन्‍ट एजेन्‍सी बनाई जा रही है इन कम्‍पनियों मेें एचओसीएल, स्कूटर्स इंडिया, बीपीसीएल (Bharat Pumps & Compressors Ltd) आदि‍ शामिल हैं। वैसे अभी भारतीय अर्थव्‍यवस्‍था को यदि जानना चाहते हैं तो सूरत की टैक्‍सटाइल मिल की स्थिति देख सकते हैं जिनमें उत्‍पादन की क्षमता मात्र 10 प्रतिशत ही रह गयी है। सूरत में वो हजारों परिवार जो कपडा उद्योग में बढ चढ कर देश भर को, अपनी कला का प्रदर्शन कपडों के माध्‍यम से करते रहे हैं वो आज सब्‍जी बेचकर परिवार का पालन पोषण कर रहे हैं। ये हाल एक मात्र सूरत का ही नहीं है यही हाल दिल्‍ली का भी है दिल्‍ली में भी हर गली में एक सब्‍जी की दुकान खोलकर परिवार चलाने की कवायद की जा रही है कारण कोरोना हो या फिर देवी आपदा। परन्‍तु इतना तो सच कहा जा सकता है कि कोरोना उस प्रदेश मेें था जिस प्रदेश में चक्रवात और बाढ नहीं थी। वास्‍तव में देवी आपदा को नहीं भूला जा सकता है परन्‍तु वो भी मात्र उस क्षेत्र में जहॉ पर लौट लौटकर बाढ आयी है जिसकी खबर जनता तक टीवी चैनल पहुॅॅॅॅॅॅचाना शायद सरकार की तौहीन समझते हैं। दूसरी तरफ कुछ अर्थशास्‍त्री ये भी कह रहे हैं कि दुनिया की 5वीं सबसे बड़ी अर्थव्‍यवस्था (अमेरिका, चीन, जापान, जर्मनी के बाद) होने का गौरव भी गंवा सकता है। मशहूर लेख‍िका अरुंधति रॉय ने न्‍यूयॉर्क टाइम्‍स से बातचीत में कहा, “इंजन खराब हो चुका है। सर्वाइव करने की काबिलियत खत्‍म कर दी गई है। और उसके टुकड़े हवा में उछाल दिए गए हैं, आपको नहीं पता कि वे कब और कैसे गिरेंगे।” वशर्ते आज की दशा कुछ भी न हो यदि इसी तरह से पश्चिम का पीछा करके भारतीय शास्‍त्र को विसारा जाता रहा तो इतना अवश्‍य कह सकता हूॅॅ कि अब भूखमरी द्वार पर खडी है क्‍योंकि बाढ ने और चक्रवात जैसी वास्‍तविक देवी आपदा ने पूरेे देश की फसल भी चौपट कर दी है।

सुनील शुक्‍ल

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