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हनुमान जयंती पर करें सुंदर कांड का पाठ

दिल्ली :  हनुमान जी की लीलाओं का गान है सुंदर कांड

अतुलित बलधामं, हेमशैलाभदेहं। दनुजवनकृशानुं, ज्ञानिनामग्रगण्यम्। सकलगुण निधानं, वानराणामधीशं। रघुपतिप्रिय भक्तं, वातजातं नमामि॥’अर्थात् अतुल बल के धाम, सोने के पर्वत (सुमेरु) के समान कांतियुक्त शरीर वाले, दैत्य रूपी वन (को ध्वंस करने) के लिए अग्नि रूप, ज्ञानियों में अग्रगण्य, संपूर्ण गुणों के निधान, वानरों के स्वामी, श्री रघुनाथ जी के प्रिय भक्त पवनपुत्र श्री हनुमानजी को मैं प्रणाम करता हूं। कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी के अलावा चैत्र पूर्णिमा
को भी हनुमान जयंती मनाई जाती है, जो इस वर्ष 31 मार्च को है। भगवान शंकर के अवतार थे हनुमान। इनके पिता पवन केसरी और माता अंजना हैं।

दैहिक बल में नहीं, वरन मानसिक बल में भी।

हनुमान और राम भक्त गोस्वामी तुलसीदास जी ने लिखा है- ‘रामदूत अतुलित बलधामा। अंजनीपुत्र पवनसुत नामा। महावीर विक्रम बजरंगी।
कुमति निवार सुमति के संगी॥’ सच्चे सेवक और निष्काम सेवा के सर्वोच्च उदाहरण हैं हनुमान जी। इनका जीवन निष्कलंक था। भगवान राम ने इन्हें लक्ष्मण से बढ़कर अपना अनन्य सेवक माना है।

 

सुंदर कांड, हनुमान जयंती पर करें सुंदर कांड का पाठ

हनुमान भक्तों को हनुमान जयंती व्रत के एक दिन पूर्व ही शाम को भोजन का त्याग कर देना चाहिए और पूर्ण ब्रह्मचर्य का पालन करते हुए राम, सीता, लक्ष्मण और हनुमान नाम का सुमिरण कर जमीन पर ही सोना चाहिए। अगले दिन यानी हनुमान जयंती के दिन हनुमान जी की मूर्ति पर सिंदूर चढ़ाते समय यह मंत्र पढ़ना चाहिए- ‘मनोजवं मारुततुल्यवेगं जितेन्द्रियं बुद्धिमतां वरिष्ठं। वातात्मजं वानरयूथमुख्यं श्रीरामदूतं शरणं प्रपद्ये।।’भगवान शिव के ग्याहरवें रुद्र के रूप हनुमान, आज भी जहां रामचरित का गुणगान होता है, वहां मौजूद रहते हैं। इन्हें अणिमा, लघिमा, महिमा, गरिमा, प्राप्ति, प्राकाम्य, ईशित्व और वशित्व रूपी अष्ट-सिद्धियां प्राप्त थीं। हनुमान जी को लंका में देख कर सीता जी ने आशीर्वाद दिया था- ‘अजर अमर गुननिधि सुत होहू। करहुं बहुत रघुनायक छोहू॥’

हनुमत् पुराण में हनुमान जी का नाम सुंदर बताया गया है। बाल्मीकि रामायण और तुलसी कृत
रामचरितमानस में हनुमान जी की लीलाओं का गान सुंदर कांड में संभवत: इसीलिए किया गया है। इस दिन सुंदर कांड का पाठ जरूर करना चाहिए। हनुमान जी के 12 नाम – हनुमान, अंजनी सुत, वायु पुत्र, महाबल, रामेष्ठ, फाल्गुण सखा, पिंगाक्ष, अमित विक्रम, उदधिक्रमण, सीता शोक विनाशन, लक्ष्मण प्राणदाता, दशग्रीव दर्पहा सुमिरण करने से किसी भी प्रकार का संकट समाप्त हो जाता है। साथ ही भगवान राम की भक्ति भी प्राप्त होती है। मध्यप्रदेश के सतना जिले में स्थित विश्वप्रसिद्ध चित्रकूट धाम में हनुमान धारा, अयोध्या में हनुमान गढ़ी और बनारस में संकटमोचन मंदिर हुनमान जी के प्रसिद्ध मंदिर हैं।

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