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श्रीराम के पूजा स्‍थल में ”सप्तश्रृंगी देवी मंदिर”

नई दिल्‍ली, श्रीराम सांस्‍कृतिक शोध संस्‍थान द्वारा चलायी जा रही श्रीराम वन गमन यात्रा से डा. राम अवतार शर्मा द्वारा शोध कार्य में लोक कथा को भी शमिल किया है जिससे भारत भर के सम्‍पूर्ण श्रीराम वन गमन मार्ग से बहुत कुछ ज्ञात भी होता है, डा. राम अवतार शर्मा जी के कथन के अनुसार लोककथा और लोकगीत सिर्फ कहने और गाने का उददेश्‍य न होकर अपनी पुरानी संस्‍कृति की पहचान भी बताते है  जहां लोकगीत ”सती अनुसूईया ने डाल दियो पालना, झूल रहे तीन देव बनकरके लालना” लाेकगीत एक कथा भ्‍ाी बताती है वैसे ही एक लोक कथा के अनुसार महिषासुर को मारने के पश्‍चात् माता दुर्गा ने नासिक के सप्तश्रृंग पर्वत माला पर है, भक्‍तों की श्रद्वा का केन्‍द्र विचित्र संयोग बना कि वाल्‍मीकि रामायण के अनुसार राक्षसों के वध की प्रतिज्ञा के बाद श्रीराम को शक्‍ति संचय की आवश्‍यकता थी इसीलिए माता सीता, लखन लाल सहित श्रीराम यहां पधारे थे और अष्‍टदशभुजाधारी की पूजा की थी तथा जगत जननी से शक्‍ति के श्‍ास्‍त्र भेंट किये थे, यह महाराष्ट्र में देवी के साढ़े तीन शक्तिपीठ में से अर्धशक्तिपीठ वाली सप्तश्रृंगी देवी नासिक से करीब 60 किलोमीटर की दूरी पर 4800 फुट ऊँचे सप्तश्रृंग पर्वत पर विराजित हैं। जहाँ एक तरफ गहरी खाई और दूसरी ओर ऊँचे पहाड़ पर हरियाली के सौंदर्यं के बीच विराजित देवी माँ प्रकृति से हमारी पहचान कराती प्रतीत होती हैं। यदि माता का बुलावा आये ताे अवश्‍य ही आप भी दर्शन करने जाये, इस पर्वत माला के दर्शन मात्र से शरीरिक थकान और मानसिक शान्‍ति ऐसी मिलती है कि अविस्‍मणीय यात्रा प्रतीत होती है

यही पर श्रीराम और सीता का मन्‍दिर आज भी बना हुआ है

सुनील शुक्ल
उपसंपादक: सत्यम् लाइव

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