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भारत के कैंसर वाला गांव

उत्तर प्रदेश के शामली जिले में एक ऐसा गांव है, जिसे अब लोग कैंसर वाले गांव के नाम से जानते हैं। इस गांव में अब तक दर्जनों लोग कैंसर की वजह से काल के गाल में समा चुके हैं, कई अन्य जिंदगी और मौत की लड़ाई लड़ रहे हैं। जी हां, आप ठीक समझे! हम बात कर रहे है, शामली जिले के थाना थानाभवन क्षेत्र के हसनपुर लुहारी की। ग्रामीणों का दर्द कोई अधिकारी सुन नहीं रहा है, अब तो ग्रामीण दुआ कर रहे हैं कि कोई ऐसा शख्स उनकी बात सुन ले, जो उन्हें इस अभिशाप से मुक्ति दिला दे।

दर्जनभर लोग गंवा चुके हैं जान
इस गांव के लोग कैंसर की बीमारी से मौत के मुंह में समा रहे हैं। कैंसर की मुख्य वजह गांव का प्रदूषित पानी है। स्थिति ये है कि पिछले एक साल में गांव के अंदर कैंसर से छह लोगों की मौत हो चुकी है। गंदा पानी पीने से होने वाले कैंसर की वजह से गांव के कुल 12 लोग अपनी जान गंवा चुके हैं।

11 हजार लोग दूषित पानी पीने को मजबूर
गांव हसनपुर लुहारी में करीब 24 हजार की आबादी के लिए पेयजल निगम की ओर से मात्र एक नलकूप व एक ओवरहैड टैंक बनाया गया है। इससे गांव की मात्र 13 हजार आबादी को ही पेयजल आपूर्ति हो पाती है, जबकि बाकी 11 हजार की आबादी आज भी हैडपंपों से दूषित पानी पीने को मजबूर है।

स्वास्थ्य विभाग नहीं सुन रहा फरियाद
दूषित पानी के सेवन से ही तीन साल पहले गांव निवासी संदीप महले को मुंह में कैंसर हो गया था। इससे पहले भी गांव में अब तक करीब एक दर्जन लोग कैंसर के कारण मौत के मुंह में जा चुके हैं, जबकि इतने ही लोग आज भी इस खतरनाक बीमारी से जूझ रहे हैं। यही नहीं स्वास्थ्य विभाग की टीम भी अब तक दो बार गांव में आकर जांच पड़ताल कर चुकी है और स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट भी इस बात की तस्दीक करती है कि गांव में इस भयावह बीमारी की जड़ सिर्फ दूषित पानी ही है। बावजूद इसके कोई अधिकारी गांव की समस्या की ओर ध्यान देने को तैयार नहीं। ग्रामीणों का कहना है कि कैंसर की जड़ गांव में दूषित पानी है। उबालने पर पानी में गंदगी निकलती है। कई बार स्वास्थ्य विभाग को भी इस बाबत जानकारी दी जा चुकी है, लेकिन स्वास्थ्य विभाग चैन की नींद सो रहा है।

पयालन करने पर मजबूर हो रहे ग्रामीण
दूषित पानी पीने से फिलहाल गांव में 30 साल से अधिक आयु वर्ग के लोग चपेट में हैं, लेकिन ग्रामीणों को खतरा बना हुआ है कि कहीं गंदा पानी पीने से गांव की युवा पीढ़ी भी इसकी चपेट में न आ जाए, इसलिए अधिकांश लोग अपने बच्चों को गांव में रखना ही नहीं चाह रहे। कई लोगों ने अपने बच्चों को दूसरे शहरों या रिश्तेदारों के यहां पढ़ाने के लिए भेज दिया है।

चार साल से गहराया है संकट
गांव में पिछले दस सालों से कैंसर जैसी बीमारी पनप रही है, लेकिन चार साल से यह बीमारी और ज्यादा पांव पसार रही हैं। लेकिन हैरत की बात ये है कि स्वास्थ्य विभाग व प्रशासन को इस बात की जानकारी है, बावजूद इसके अधिकारी कोई ठोस कदम उठाने को तैयार नहीं हैं। ग्रामीण लखनऊ तक शिकायत कर थक चुके हैं, लेकिन किसी का इस ओर कोई ध्यान तक नहीं है।

अब कैंसर वाले गांव से हुआ बदनाम
गांव हसनपुर लुहारी में कैंसर के पीड़ितों की संख्या इस कदर बढ़ गई है कि अब तक दर्जनों लोग कैंसर के गाल में समां चुके हैं, तो वहीं कई जिंदगी और मौत की लड़ाई लड़ रहे हैं। बाहर के लोग इस गांव को कैंसर वाला गांव कहने लगे हैं।

कई मासूमों से छिन गया पिता का साया
गांव में कैंसर की बीमारी तेजी से बढ रही है। दो तीन साल के अंदर ही कैंसर होता है और ग्रामीण काल के गाल में समा जाते है। ग्रामीण सोनू सलमानी कहते हैं, गांव में कैंसर की बीमारी लगातार पनपती जा रही हैं। इस संबंध में गांव के लोग कई बार अधिकारियों को शिकायत भी कर चुके हैं, लेकिन कोई इस समस्या के प्रति गंभीर नहीं है, जबकि ग्रामीणों में भय का माहौल बना हुआ है।

ग्रामीणों की पीड़ा भी सुनें
ग्राम पंचायत सदस्य राजकुमार कहते हैं, अब तक गांव में करीब एक दर्जन लोगों की कैंसर के कारण मौत हो चुकी है। जबकि इतने ही लोग आज भी इस बीमारी से जूझ रहे हैं। कई बार शिकायत भी कर चुके है लेकिन कोई सार्थक परिणाम सामने नहीं आ रहा। अमति कुमार कहते हैं- ग्रामीणों की बार-बार शिकायत पर दो बार स्वास्थ्य विभाग की टीम ने गांव में आकर जांच पड़ताल जरूर की और इस बात को माना भी कि गांव में यह बीमारी गंभीर रूप ले चुकी है। लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई।

प्राम प्रधान की भी नहीं सुन रहे अधिकारी
राहुल धीमान ने बताया कि गांव में एक और नलकूप बाईपास पर लगवाने की कई बार मांग कर चुके हैं। जिससे गांव की आधी आबादी को सही पानी मिल सके। लेकिन किसी का इस ओर कोई ध्यान नहीं है। अब ग्रामीण शिकायत करके भी थक चुके हैं। ग्राम प्रधान स्वाति सैनी कहती हैं- ग्राम सभा की ओर से पेयजल निगम को दूसरे नलकूप के लिए कई बार प्रस्ताव भेजा जा चुका है, लेकिन प्रस्ताव पर काम करना तो दूर की बात पेयजल निगम के अधिकारी गांव में आकर इस समस्या को देखने तक को राजी नहीं हैं। अब फिर से ग्राम सभा की ओर से पेयजल निगम को प्रस्ताव भेजा जाएगा।

 

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