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एमसीडी में फिर खिला ‘कमल’, ‘आप’ के अरमानों पर फिरा पानी

दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) चुनाव की आज जारी मतगणना के शुरुआती रुझानों में भाजपा ने बढ़त बनाई जो अभी तक बरकरार है. वहीं, दिल्ली में सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी को करारा झटका लगा है.

दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) चुनाव में भाजपा ने प्रचंड बहुमत के साथ जीत की हैट्रिक लगाई है. वहीं आम आदमी पार्टी के अरमानों पर पानी फिर गया.

बुधवार सुबह आठ बजे तीनों नगर निगमों के 270 वॉर्डों के लिए शुरू हुई मतगणना के शुरुआती रुझानों में भाजपा ने बढ़त बनाई जो लगातार बरकरार रखी. इन नतीजों से एक बार फिर जहां कांग्रेस को निराशा ही हाथ लगी वहीं. वहीं दिल्ली में सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी को तगड़ा झटका लगा है.
मतदान के बाद आए एग्जिट पोलों में भाजपा की भारी जीत की संभावना जताई गई थी और नतीजे भी उसी के अनुरूप देखने को मिले.
इस जीत ने साबित कर दिया कि मोदी लहर अभी भी बरकरार है और भाजपा मोदी लहर के सहारे लगातार तीसरी बार निगमों पर काबिज हो रही है.
भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने कहा, यह जीत देश की जनता में प्रधानमंत्री मोदी जी की गरीब-कल्याण योजनाओं और सबका साथ-सबका विकास की नीतियों में दिख रहे निरंतर विश्वास की जीत है.

उन्होंने कहा कि दिल्ली की जनता ने बहानों और आरोपों की राजनीति को नकार दिया और प्रधानमंत्री मोदी जी के नेतृत्व वाली विकासशील राजनीति में विश्वास व्यक्त किया.

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उन्होंने दिल्ली की जनता को धन्यवाद देते हुए कहा, दिल्ली के परिणाम ने भाजपा के विजय रथ को और आगे बढ़ाया है.
वहीं आम आदमी प्रार्टी इस हार का दोष ईवीएम पर मढ़ रही है. दिल्ली के उपमुख्यमंत्री और आप नेता मनीष सिसोदिया ने कहा कि भाजपा को वोट देने का दिल्ली के लोगों के पास कोई कारण नहीं था.

सिसोदिया ने बताया, “वोटों में थोड़ा-बहुत अंतर समझ आता है, लेकिन ईवीएम में बिना छेड़छाड़ के वोटों में इतना बड़ा अंतर नहीं हो सकता.”
उन्होंने कहा कि ईवीएम की विश्वसनीयता पर पहले सवाल उठा चुकी भाजपा अब कह रही है कि ‘ईवीएम के साथ छेड़छाड़ नहीं हो सकती.’
आप ने नेता गोपाल राय ने कहा कि जिस तरह से भाजपा को जीत मिली है यह मोदी लहर से नहीं ईवीएम लहर से ही संभव है.
उल्लेखनीय है कि पंजाब, गोवा विधानसभा चुनाव में हार के बाद से ही दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ईवीएम में छेड़छ़ाड़ का आरोप लगाते रहे हैं.

उधर, कांग्रेस इन चुनावों के जरिये दिल्ली में अपनी खोई जमीन वापस पाने की उम्मीद लगाए हुए थी. लेकिन कांग्रेस का प्रदर्शन निराशा से उबारने वाला नहीं रहा. इसके चलते अजय माकन ने हार की नैतिक जिम्मेदारी स्वीकार करते हुए पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया.

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