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एक ऐसा गांव जहां बंदर बच्चों को नहीं भेज रहे स्कूल

रिसदा: बंदर के खौफ की वजह से माँ कहती हैं सो जा बेटा नहीं तो बंदर आ जाएगा। जब इस गांव में बंदरों का आतंक सिर चढ़कर बोल रहा है राह चलते आते जाते या घर बैठे लोगों पर हमला करने वाले बंदरों ने पूरे गांव को दहशतजदा कर दिया है। डर के साए में जी रहे ग्राम रिसदा में चार दिन पहले एक महिला के सिर को इस कदर बंदरों ने नोचा कि जान बचाकर भागी महिला के सिर पर 11 टांके लगवाने पड़े। गांव के बच्चों ने स्कूल जाना छोड़ दिया है। इसकी जानकारी वनअधिकारी को देकर इससे निजात दिलाने की मांग की।

ग्रामीणों ने बताया कि गांव में दो बंदर पागल व खुंखार हो गए हैं और वे ग्रामीणों को लगातार हमला कर घायल कर रहे हैं। अभी तक 6 ग्रामीण इन बंदरों के शिकार हुए हैं। चार दिन पूर्व गांव की महिला बृहष्पति वर्मा दुधमुंहे बच्चे को छत पर खिला रही थी तभी पागल बंदर आकर बच्चे के ऊपर झपट्टा मार दिया।

बच्चे को बचाने के लिए बंदर से लड़ भिड़ी और बंदर ने उसके सिर को अपने पंजों से इतना नोच डाला कि सिर से खून की धार फूटने लगी। यही नहीं बंदरों ने उसके मुंह को भी बुरी तरह से नोट डाला है। उसके पहले बंदरों छत पर झाडू लगा रही बुजुर्ग महिला दयावती साहू पर हमला कर दिया।

इसी प्रकार एक अन्य घटना में चार साल की बच्ची राजनंदनी मांडले अपने घर में खेल रही थी तभी खुंखार बंदर आकर राजनंदनी को छत में गिरा कर उसके भी पैर में हमला कर दिया। जब वो चिखी तो घर वाले आकर बंदर को भगाए हैं तब तक बंदरों ने उसके पैर को काट लिया।

बुधवार की सुबह मनारेगा कार्य करने जा रही जुगरी बाई भारती जब सुबह से फावड़ा लेकर निकल रही थी तभी घर पर प्रवेश कर पागल बंदर ने उसके पैरों को नोच डाला। आसपास के मोहल्लेवासियों ने बंदर को भगाया और जिला अस्पताल लया गया जहां उसे रैबिज का इंजेक्शन लगाया गया।

गांव में खौफ

अभी तक दोनों बंदर पकड़ से बाहर है जिससे ग्राम में खौफ का माहौल बना हुआ है। ग्रामीण अपने बच्चों को घर से बहर नहीं निकलने दे रहे हैं। कई परिवार अपने बच्चों को स्कूल तक नहीं भेज रहे हैं। वन अमले द्वारा बंदर पर काबू नहीं पाने से पूरा गांव खौफ मैं है।

बंदर नहीं आए वन विभाग के हाथ

19 मार्च को ग्राम के उपसरपंच परेश वैष्णव न जिले के वन विभाग को फोन पर जानकारी दी जिस पर वन विभाग के कर्मचारी गांव आकर बंदरों को पकड़ने का प्रयास तो किया लेकिन बंदर के उथलकूद से वे असफल होकर लौट गए। वहीं 21 मार्च को ग्रामीण सहित जनप्रतिनिधि जिले के वनमंडलाधिकारी के नाम आवेदन देकर गांव में हो रहे बंदरों के आंतक की जानकारी दी।

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