Breaking News
prev next

उपचुनाव में एक बार फिर मतदाता मुखर हुआ

नई दिल्ली: भारत के लोकतन्त्र की सबसे बड़ी विशेषता यह रही है कि चुनाव के समय मतदाता ही बादशाह होता है। इस समय राजनेताओं के भाग्य का फैसला करने का अधिकार उसी को होता है। हमने यह बात सत्तर वर्षीय लोकतंत्र के जीवन में एक बार नहीं, बल्कि अनेक बार देखी है। जब-जब इन मतदाताओं को नजरअंदाज किया गया, राजनैतिक दलों को मुंह की खानी पड़ी है। हाल में सम्पन्न हुए कई राज्यों के विधानसभा व लोकसभा उपचुनावों के नतीजों से जो सन्देश निकला है वह यही है कि भारत के लोकतन्त्र को जीवन्त और ऊर्जावान बनाये रखने में मतदाताओं ने एक बार फिर अपने अधिकार का बहुत सूझबूझ एवं विवेक से उपयोग किया हैं। उसने जो निर्णय दिया है उससे कुछ राजनैतिक नेतृत्व जीत की खुशफहमी और हारने के खतरे की फोबिया से ग्रस्त दिखाई दे रहे हैं। इन उपचुनाव, खासकर उत्तर प्रदेश के कैराना लोकसभा एवं नूरपुर विधानसभा के नतीजों को देखकर सभी चैंकन्ने हैं कि ये भाजपा के लिये नाक का सवाल थी, जिनकी हार नए अर्थ दे रही है। इन चुनाव परिणामों ने 2019 के इंतजार को न केवल रोचक बनाया बल्कि एक बार फिर इन परिणामों से लोकतंत्र मजबूत होता हुआ प्रतीत हुआ है। सक्षम एवं सफल लोकतंत्र के लिये सशक्त विपक्ष प्रथम प्राथमिकता है, जिसके लगातार कमजोर एवं बेबस होने से लोकतंत्र के मायने ही सिमटते जा रहे थे। ऐसे हालात में ताजा नतीजे बता रहे हैं कि सोता हुआ विपक्ष भी सक्रिय हुआ है और नई करवट ले रहा है। लेकिन इन उपचुनाव परिणामों का एक सन्देश और है कि नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में जितने भी उपचुनाव हुए हैं, उनमें उसे हार का मुंह ही देखना पड़ा, लेकिन इसके बाद हुए सभी आम चुनावों में उसने शानदार जीत हासिल की है। कहीं ये चुनाव परिणाम एक बार फिर 2019 के भाजपा के एक तरफा जीत को तो सुनिश्चित नहीं कर रहे हैं?
इन उप-चुनावों के नतीजे उम्मीदवारों या पार्टियों की ताकत के बारे में कम और माहौल के बारे में ज्यादा बताते हैं। इनसे किसी राजनीतिक दल के भविष्य को सुनिश्चित नहीं किया जा सकता, इनसे केन्द्रीय राजनीति की दिशा की थाह भी नहीं नापी जा सकती। क्योंकि इनमें किसी राजनीतिक दल की लहर नहीं, स्थानीय समीकरण ज्यादा बड़ी भूमिका निभाते हुए दिखाई दिये हैं। इन उप-चुनाव के परिणामों से हम आम-चुनाव की दशा और दिशा का स्पंदन भी महसूस नहीं कर सकते। दस विधानसभा और चार लोकसभा सीटों के ताजा नतीजों को आम चुनाव की तस्वीर से जोड़ कर देखना हमारी भूल होगी। जिन चार लोकसभा सीटों पर ये उप-चुनाव हुए, वे देश के चार कोनों पर हैं। चारों का राजनीतिक यथार्थ एक-दूसरे से एकदम जुदा है। यही हाल अलग-अलग राज्यों की विधानसभा सीटों का भी है। हर सीट एक अलग ही कहानी कहती है।
इन उपचुनावों में टक्कर सरकार और विपक्ष के बीच रही। पर हमें यह देखना है कि असली टक्कर वोट हासिल करने के लिए है या मूल्यों के लिए? राजनेताओं को मजबूत करने के लिये है या राष्ट्र को? लोकतंत्र का यह पहला सशक्त स्तम्भ भी मूल्यों की जगह वोट की लड़ाई लड़ रहा है, तब मूल्यों का संरक्षण कौन करेगा? एक खामोश किस्म का ”वोट युद्ध“ देश में जारी है। एक विशेष किस्म का मोड़ जो हमें गलत दिशा की ओर ले जा रहा है, यह मूल्यहीनता और वोट हासिल करने की मनोवृत्ति अपराध प्रवृत्ति को भी जन्म दे रही है। हमने सभी विधाओं को येन-केन-प्रकारेण सत्ता हासिल करने का हथियार समझ लिया है। जहां सत्ता कद्दावर होती जा रही है और मूल्य बौना। क्या हो रहा है हमारे देश में? सिर्फ सत्ता ही जब राजनीति का एकमात्र उद्देश्य बन जाता है तब वह सत्ता दूसरे कोनों से नैतिक, सामाजिक और सांस्कृतिक स्तरों पर बिखरने लगती है। सत्ता बहुत कुछ है, पर सब कुछ नहीं। सब कुछ मान लेने का ही परिणाम है कि राष्ट्र कमजोर हो रहा है और राजनेता मजबूत। लेकिन मतदाता जागरूक है और अपने अधिकार का सम्यक् उपयोग करके उसने मूल्यों को बिखरने नहीं दिया।
मतदाता के लोकतान्त्रिक अधिकार पर सिर्फ उनका ही अधिकार है। इसके प्रयोग करने की उनकी सामथ्र्य को कोई भी चुनौती नहीं दे सकता। उपचुनाव का जो परिणाम निकल कर आया है उससे आश्चर्य में पड़ने की जरा भी जरूरत नहीं है क्योंकि अभी तक कोई भी ऐसा सूरमा पैदा नहीं हुआ है जो लोगों के दिमाग में उठने वाले सवालों को खत्म कर सके। कैराना लोकसभा सीट के उपचुनाव को कोरा राजनीति हार-जीत का मैदान बनाने वालों ने बहुत बड़ी चुक कर दी थी, क्योंकि यह चैधरी चरण सिंह की विरासत है
जहां ग्रामीण विकास की अमर गाथाएं लिखी है, यह वही जमीन है जिसमें अब्दुल करीम खान साहब के स्वरों की मीठी गूंज भी शामिल है। यहां के मतदाताओं ने अपना फैसला दिया है उससे साबित हो रहा है कि हिन्दुस्तान का गन्ना उगाने वाला किसान जब अपने खेतों में काम करता है तो वह न हिन्दू होता है न मुसलमान बल्कि वह कोरा किसान होता है और उसकी समस्याओं को राजनीतिक नेतृत्व को इसी नजर से देखना होगा। यहां के लोगों ने मिलकर एक बार फिर अनूठी इबादत लिखी है और राजनीति को परे फेंक कर अपने मन की करने की हिम्मत दिखाई है। यह हार-जीत किसी पार्टी की नहीं बल्कि कैराना की महान विरासत की है। यह भविष्य की राजनीति का वह झरोखा है जिसे स्वयं मतदाताओं ने खोला है। जहां तक अन्य उपचुनावों के परिणामों का सवाल है तो स्पष्ट है कि प. बंगाल में ममता के नेतृत्व में लोगों का विश्वास कायम है। बिहार के जोकीहाट उपचुनाव से जो हवाएं उठी हैं वे जमीन से जेल तक लालू जी स्वीकृति को बयां कर रही हैं।
उप-चुनावों के नतीजे हमें भले ही अगले साल के आम चुनाव का कोई स्पष्ट संकेत न देते हों, लेकिन एक बात तो बता ही रहे हैं कि अगला चुनावी संग्राम ज्यादा दिलचस्प होने वाला है। हालांकि इस बीच मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान जैसे कई महत्वपूर्ण राज्यों के विधानसभा चुनाव भी होने हैं, जो शायद अगले आम चुनाव की तस्वीर को समझने में हमारी ज्यादा मदद करें। विपक्ष की यह जीत अगले लोकसभा चुनावों के लिहाज से उसकी एकजुटता की संभावना को तो मजबूती देगी ही, लेकिन बीजेपी के सामने असल खतरा अपने दिग्विजयी प्रचार के जाल में खुद ही फंस जाने का है।
जब बदलाव शुरू होता है तब समय अच्छा या बुरा नहीं होता। अच्छा या बुरा होता है उस समय में जीया गया हमारा कर्म जो चरित्र की व्याख्या करता है। आज जरूरत है बदलते हुए पर्यायों को समझने की, क्योंकि जो युग के साथ चल न सके, उसकी भाषा में बोल न सके, उस शैली में जी न सके वह फिर जनप्रतिनिधि कैसा? और जो पुरातन संस्कृति, परम्परा, आदर्श, चिंतन के तजुर्बे का आदर न कर सके, वह फिर नेतृत्व कैसा? सत्ता और स्वार्थ ने अपनी आकांक्षी योजनाओं को पूर्णता देने में नैतिक कायरता दिखाई है। इसकी वजह से लोगों में विश्वास इस कदर उठ गया कि चैराहे पर खड़े आदमी को सही रास्ता दिखाने वाला भी झूठा-सा लगता है। आंखें उस चेहरे पर सचाई की साक्षी ढूंढती हैं।
वर्ष 2019 के आम-चुनाव की ओर अग्रसर होते हुए हमें इस सचाई को समझना चाहिए कि हमने इस बार जीने का सही अर्थ ही खो दिया है। यद्यपि बहुत कुछ उपलब्ध हुआ है। कितने ही नए रास्ते बने हैं। फिर भी किन्हीं दृष्टियों से हम भटक रहे हैं। गांव-गांव तक बिजली पहुंचाने के लक्ष्य में हम लगे हैं फिर भी ना जाने कितने अंधेरों में स्वयं डूबे हैं। भौतिक समृद्धि बटोरकर भी न जाने कितनी रिक्ताओं को सहा है। गरीब अभाव से तड़पा है, अमीर अतृप्ति से। कहीं अतिभाव, कहीं अभाव। जीवन-वैषम्य कहां बांट पाया अपनों के बीच अपनापन। बस्तियां बस रही हैं मगर आदमी उजड़ता जा रहा है। ऐसी स्थितियों में भविष्य की सत्ता का चेहरा बनाने में मतदाता को मुखर होना ही होगा। वर्तमान राजनीतिक नेतृत्व को भी दोहरा दायित्व निभाना है। अतीत की भूलों को सुधारना और भविष्य के निर्माण में सावधानी से आगे कदमों को बढ़ाना। वर्तमान के हाथों में जीवन की संपूर्ण जिम्मेदारियां थमी हुई हैं। हो सकता है हम परिस्थितियों को न बदल सकें पर उनके प्रति अपना रूख बदलकर नया रास्ता तो अवश्य खोज सकते हैं।
प्रेषकः
(ललित गर्ग)
60, मौसम विहार, तीसरा माला, डीएवी स्कूल के पास, दिल्ली-110051
फोनः 22727486, 9811051133

विज्ञापन

अन्य ख़बरे

  • जिला गौतम बुध नगर सक्षम यूनिट का पुनर्गठन
    सत्यम लाइव 21 नवंबर 2020 गौतम बुध नगर जिला गौतम बुध नगर सक्षम की यूनिट का आज पुनर्गठन किया गया है जिसमें मुख्य अतिथि के तौर पर श्री राम कुमार मिश्रा जी राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य व उत्तर क्षेत्र के प्रभारी व सक्षम […]
  • अब दिल्ली के लेबर का रजिस्ट्रेशन जरूरी
    सत्‍यम् लाइव, 19 नवम्‍बर 2020, दिल्‍ली।। दिल्‍ली में अब लेबर का रजिस्‍ट्र्रेशन अब अनिवार्य हो गया है इसमें से सभी इलैक्‍ट्र्रीशियन, प्‍लेम्‍बर से लेकर सभी वो आयेगीं जो पल्‍ली इधर से उधर ले जाता हैै आप पूरा इसको […]
  • दिल्‍ली बाजार बन्‍द करने की अनुमति मॉगी.. केजरीवाल
      सत्‍यम् लाइव, 17 नवम्‍बर 2020, दिल्‍ली।। दिल्‍ली बाजार को बन्‍द करने की अनुमति भारत सरकार से मॉगी गयी हैै अब जल्‍द ही कोरोना के संकट को देखते हुए, दिल्‍ली के बाजार को बन्‍द किया जा सकता है। मैं कुछ कहूू उससे […]
  • दिल्‍ली में 12 चरणों में होगा, कोरोना से बचाव
    सत्‍यम् लाइव, 17 नवम्‍बर 2020, दिल्‍ली।। रविवार को केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह और दिल्ली की मुख्‍यमंत्री केजरीवाल सहित कई बडे अधिकारियों ने दिल्ली में कोरोना संक्रमण की तीसरी लहर पर वर्त्‍ता की । केंद्रीय स्वास्थ्य […]
  • चुनाव के बाद फिर बढा रहा कोरोना
    सत्‍यम् लाइव, 17 नवम्‍बर 2020, दिल्‍ली।। कल दिल्‍ली मेें, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के साथ दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्‍द्र केजरीवाल के बीच में मीटिंग करके कोरोना से निपटने की तैयारी पुन: प्रारम्‍भ कर दी। […]
  • गौमय बसती लक्ष्‍मी, गौमूूूूत्र धनवन्‍तरि … सौम्‍या पाण्‍डे
    सत्‍यम् लाइव, 15 नवम्‍बर 2020, दिल्‍ली।। इस दीपावली के शुभ अवसर पर भारतीय नस्‍ल की गौ माता के बने उत्‍पादों को सभी ने स्‍वीकार किया। दीपों केे इस त्‍यौहार पर आदरणीया सौम्या पांडे जी (आईएएस) मुख्य विकास अधिकारी […]