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इंसान की जगह लेगा कंप्यूटर जाने कैसे ?

ह्यूस्टन: आज की दुनिया मे इंसानो की तरह फैसला लेना वाला कंप्यूटर आ रहा है इस टेक्नोलॉजी मे अमेरिका के वैज्ञानिक ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (कृत्रिम बुद्धिमता (एआइ)) का तेजी से विकास करने में लगे हुए हैं। भावी पीढ़ी के ऐसे कंप्यूटर, स्मार्टफोन और रोबोट तैयार किए जा रहे हैं, जो मनुष्यों के काम को बेहद आसान कर देंगे। इसी कड़ी में वैज्ञानिक एक ऐसा नवीन एआइ प्लेटफॉर्म तैयार कर रहे हैं, जिससे कंप्यूटर किसी चीज को इंसानों की तरह सीख सकेंगे। यानी हर काम के लिए किसी खास प्रोग्राम को तैयार करने की जरूरत नहीं होगी। जिस तरह से इंसान अपनी बुद्धि के जरिए फैसले लेता है कि विभिन्न स्थितियों में उसे क्या कदम उठाना है, ठीक उसी तरह से कंप्यूटर भी किसी कार्य के लिए अपनी सोच से निर्णय ले सकेंगे।

पॉल राड के मुताबिक, काग्निटिव लर्निंग (संज्ञात्मक शिक्षा) के जरिए कंप्यूटरों में स्वयं सीखने की प्रणाली विकसित की जा सकती है और वो भी बिना किसी खास प्रोग्राम के। अध्ययन के दौरान हमने पाया कि हम एक ऐसा प्लेटफॉर्म तैयार कर सकते हैं, जिसके जरिए कंप्यूटर किसी चीज को बिल्कुल उस तरह से ही सीखेंगे जिस तरह से हम सीखते हैं। क्लाउड आधारित प्लेटफॉर्म को तैयार करने के लिए शोधकर्ताओं ने बीते पांच दशक में शिक्षा और समझ के विकास क्रम को जाना। इसके पीछे शोधकर्ताओं का उद्देश्य यह जानना था कि कंप्यूटर में किस तरह से सोचने और तर्क करने की क्षमता विकसित की जा सकती है।

पॉल के मुताबिक, हमारा लक्ष्य मशीनों को बेहतर बनाना है ताकि वे हमारी मदद कर सकें। इसके लिए हम ये देख रहे हैं कि किसी चीज को मनुष्य किस तरह सीखते हैं। हम उसी प्रणाली को कंप्यूटर के लिए भी तैयार करना चाहते हैं ताकि हर काम के लिए कंप्यूटर को कमांड न देनी पड़े। जरूरत के समय वे अपने निर्णय स्वयं ले सकें। इन सब चीजों के अलावा शोधकर्ता इस पर भी अध्ययन कर रहे हैं कि मानव अपने पूरे जीवन चक्र के दौरान किस तरह सीखते हैं। उदाहरण के तौर पर बच्चे किसी चीज को पहचानने की शुरुआत खिलौनों या चेहरों के जरिए करते हैं। इसके बाद वे धीरे-धीरे बातचीत करना शुरू करते हैं। ये प्रक्रिया उनके पूरे जीवन के दौरान सतत चलती रहती है।

शोधकर्ता इसी तरह का एआइ एजेंट विकसित करने पर काम कर रहे हैं, जिसके जरिए कंप्यूटर भी मानव की तरह अपनी समझ से फैसले ले सकेंगे। वैज्ञानिकों ने उम्मीद जताई है कि जल्द ही इन चीजों के आधार पर वे एक ऐसी प्रणाली विकसित कर लेंगे, जो लोगों का काम आसान करने में मददगार साबित होगी।

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