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भारतीय रेलवे यात्रियों के खानपान की व्यवस्था को बनाए रखना मुश्किल- रविंद्र गुप्ता

सत्यम् लाइव, संवाददाता/ राजस्थान: “अखिल भारतीय रेलवे खानपान लाइसेंस फीस वेलफेयर एसोसिएशन” के जोधपुर मंडल द्वारा दिनांक 29 अगस्त 18 को (भास्कर आई .टी. आई .मेड़ता रोड ,जोधपुर मंडल ,नॉर्थ बेस्ट रेलवे ) जोधपुर मंडल के लाइसेंसियों की बैठक सम्पन्न हुई । बैठक की अध्यक्षता राष्ट्रीय अध्यक्ष रवींद्र गुप्ता ने की । जिसमें उपाध्यक्ष सीताराम शर्मा, कोषाध्यक्ष प्रवीण शर्मा सहित बीकानेर मंडल अध्यक्ष भूपेन्द्र मुदगल सहित अनेकों राष्ट्रीय पदाधिकारी भी सम्मिलित रहे ।

बैठक में लाइसेंसियों की तमाम समस्याओं पर विस्तार से चर्चा की गई, और जिनमें लाइसेंसों के नवीनीकरण, मंडल कार्यालय द्वारा जारी निविदाओं को तुरंत रद्द करने की मांग, मनमाने तरीके से बढ़ाई गई लाइसेंस फीस को वापस लेने, लाइसेंस फीस के लिए 10 सूत्री फार्मूले को तुरंत रद्द करने, 12% लाइसेंस फीस के नियम को बहाल किए जाने, खानपान का सामान बेचे जाने वाली वस्तुओं से संबंधित स्टॉल /ट्रॉली/ बालता के आवंटन नवीनीकरण मूल्य निर्धारण लाइसेंस फीस के लिए एक ही समान खान पान नीति बनाई जाए जिससे भिन्न भिन्न नीतियां बनाकर अपने चहेतों को लाभ पहुंचाने वाले अधिकारियों द्वारा किए जा रहे भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाया जा सके|

N R U C C/ ZR U C C/ D R U C C की तरह एक खानपान सलाहकार समिति का गठन किया जाए जिसमें एसोसिएशन के सदस्यों का भी प्रितिनिधित्व हो ।
सभी श्रेणियों के रेलवे स्टेशनों पर कार्यरत छोटे स्टाल/ ट्रालियों/ ट्रे / छावा बाल टा इत्यादि की यूनिटों का समयबध्य नवीनीकरण किया जाए रेल मंत्रालय ने खानपान नीति 2016 के नए मसौदे को सार्वजनिक पटल पर रखते हुए सभी हित धारियों से महत्वपूर्ण सुझाव एवं टिप्पणी की मांग की थी हमारी एसोसिएशन ने हजारों छोटे लाइसेंसधारियों व विक्रेताओं की ओर से सुझाव दिए थे एसोशियसन ने मंत्रालय द्वारा विचार विमर्श के लिए नहीं बुलाए जाने पर गंभीर नाराजगी व्यक्त की थी एसोसिएशन ने खानपान नीति 2017 की कड़ी आलोचना करते हुए कहा था की स्थिर इकाइयों के लिए निविदा स्वीकार नहीं है क्योंकि यह केवल लाभ पर आधारित है जनहित के लिए नहीं इसलिए यह सुझाव दिया गया था की कम से कम इसमें स्टेटिक यूनिटो को निविदा प्रक्रिया के तहत नहीं रखा जाना चाहिए एसोशियसन ने कहा था इस सभी विभागों से डाटा एकत्र होने के बाद यह सामने आएगा कि ज्यादातर निविदा प्रक्रिया सुस्त रही विशेष रूप से स्टेटिक यूनिटों के आवंटन में उच्च लागत और बोली प्रणाली के तहत उचित व मानक सेवा देने में विफल साबित हुई ।

एसोसिएशन के अध्यक्ष रविंद्र गुप्ता ने कहा की कथित तौर पर एकाधिकार स्टेटिक यूनिटों के मौजूदा लाइसेंसधारियों के निष्कासन, खासकर सकल घरेलू उत्पाद फार्मूला के तहत कई गुना बड़े लाइसेंस शुल्क एवं सामान्य यात्रियों को सस्ते भोजन में मिल रही बड़ी असुविधाओं की आलोचना होती रही है। एसोशियसन ने इसमें आगे सुझाव देते हुए कहा कि हमें विश्वास है की पहली पॉलिसी में चल रही यात्रियों के लिए अच्छी और सस्ती खानपान नीति को संशोधित नई खानपान नीति में बहाल किया जाएगा एसोसिएशन का मानना है नई पॉलिसी लोकहित में सामाजिक सेवा को ध्यान में रखकर बनें न कि केवल विशिष्ट वर्ग के लिए ही तैयार हो जबकि रेलवे के लिए । मुख्य रूप से लाभार्थी सामान्य आदमी ही है जो रेलवे के लिए रीढ़ की हड्डी की तरह है उन्होंने कहा कि कैटरिंग पॉलिसी मैं तब्दीली के बाद भी अब तक भारतीय रेलवे ने न्याय संगत तरीके से अपने उत्साह को साबित नहीं किया है ।एसोसिएशन आरोप लगाते हुए कहा है की आई आर सी टी सी को पर्याप्त संसाधन मुहैया कराए गए हैं चाहे भूमि की बात हो या अन्य सुविधाओं की इसमें मुख्य गतिविधियों, परिवहन एवं यात्री सेवाओं के लिए व बुनयादी सेवाओं की पर्याप्त सुविधा के लिए बाहरी स्रोतों से भी मदद ली गई है एसोशियसन ने कहा सवाल यह है कि सारी बुनियादी गतिविधियां क्या वाकई रेलवे द्वारा अनुबंधित एवं नियंत्रित होती है

रोशनएसोशियसन का यह सुझाव है की तर्कसंगत खानपान नीति के लिए एकाधिकार एवं उनकी सीमाओं की पड़ताल होनी चाहिए संपूर्ण भारतीय रेलवे पर प्रीति जोन में 10 इकाइयों की अधिकतम सीमा होनी चाहिए ,नई खानपान नीति में नीति में इस पर कोई प्रतिबंध नहीं है, मंडलस्तर पर एक ठेकेदार 5 यूनिट ले सकता है इसका मतलब यह हुआ रेलवे में 68 मंडलों में एक ही व्यक्ति पांच -पांच यूनिट ले सकता है कहने का तात्पर्य है की एक व्यक्ति को 340 यूनिट देने का प्रावधान कर दिया गया है एसोशियसन ने रेलवे प्लेटफार्म पर मौजूदा व्यवस्था को बनाए रखने का सुझाव देते हुए कहा है की रेलवे प्लेटफार्म पर स्टॉल धारक यात्रियों को कैटरिंग एवं वेंडिंग की जिम्मेदारी बहुत अच्छी तरह निभा रहे इसलिए भारतीय रेलवे की खानपान की इस मौजूदा व्यवस्था को बनाए रखने की आवश्यकता है

एसोशियसन के अध्यक्ष रविंद्र गुप्ता ने कहा कि अगर रेलवे प्लेटफार्म पर स्थितमौजूदा स्टेटिक इकाई का नवीनीकरण नहीं किया गया तो स्थिति खतरनाक हो सकती है क्योंकि उस स्थिति में विभाग इसका लाभ उठाते हुए मनमाने रूप से चयन कर छोटी इकाइयों को हटा सकती है जो पूर्ण रुप से इन छोटे वेंडरों के साथ नाइंसाफी होगी जबकि इन छोटे लाइसेंसधारियों के द्वारा मुहैया की गई सेवाओं की हर तरफ से प्रशंसा की जाती रही है इसलिए इन्हें काम करते रहने की स्वीकृति रेलवे प्रशासन द्वारा दी जानी चाहिए रेलवे बोर्ड द्वारा 15 मार्च 2017 को सर्कुलर 22 जारी करते हुए कहा है कि एक व्यक्ति एक यूनिट का नवीनीकरण करवा सकता है यदि कोई टेंडर प्रक्रिया में भाग लेकर के दूसरा स्टॉल प्राप्त कर लेता है उसको एक स्टॉल छोड़ना पड़ेगा और इसके लिए माननीय सुप्रीम कोर्ट के 29 जनवरी 2016 के आदेश का उल्लेख किया गया है सवाल यह खड़ा होता है की सुप्रीम कोर्ट के आदेश को रेलवे बोर्ड द्वारा रद्दी की टोकरी में फेंक कर बड़े लाइसेंसों के हित साधने के लिए एक व्यक्ति के लिए 340 यूनिट आवंटन की व्यवस्था खानपान नीति 2017 में कर दी गई। रेलवे बोर्ड द्वारा यात्रियों को गर्म चाय पूरी पकोड़ा इत्यादि वस्तुएं उपलब्ध हों इसके लिए 2012 में आदेश जारी किए गए थे परंतु मंडल स्तर पर इनको अभी तक लागू नहीं किया गया है इससे साफ स्पष्ट है की बोर्ड में बैठे अधिकारियों की सोच बड़े पेंट्रीकार ठेकेदारों को लाभ पहुंचाने की और छोटों को Platform से भगाने की है क्योंकि प्लेटफॉर्म पर काम करने वाले लाइसेंसी की लाइसेंस फीस 500से 800 गुना तक बढ़ा दी गई और गर्म खानपान की सुविधा उनसे छीन ली गई प्लेटफॉर्म पर कुकिंग की सुविधा बंद कर दी गयी जिससे अवैध वेंडिंग को बढ़ावा मिल रहा है ठंडा खाना पीना होने की वजह से यात्रियों ने प्लेटफार्म पर सामान खरीदना बंद कर दिया है जिससे पेंट्रीकार वालों की बिक्री बढ़ गई है ।

मंडल स्तर पर जी एस टी डिमांड एरियर के रूप में 2014 से की जा रही है जो कि गलत है जीएसटी कानून जब से लागू हुआ तभी से जीएसटी लिया जाना चाहिए । वित्त मंत्रालय रेल मंत्रालय एवं वरिष्ठ अधिकारियों को भी इस बारे में बार-बार लिखा गया परंतु कोई अभी तक सकारात्मक निर्णय नहीं लिया जा सका है ।

रेलवे एक नई MPS पॉलिसी ले कर के आई है जिस पर सभी प्रकार के खाने पीने के सामान किताबें और दवाइयां उपलब्ध होगी इसमें बड़े ठेकेदारों को लाभ पहुंचाने के लिए इनकी सभी यूनिटों को नवीनीकरण की बात कही गई है रेलवे यह नीतियां एक दूसरे के विरोधाभासी बड़े लोगों को लाभ पहुंचाने वाली है इसलिए सरकार इन सभी नीतियों के स्थान पर एक ऐसी नीति ले कर के आए जिसमें बरसों से कार्य करने वाले खानपान लाइसेंसियों के लाइसेंसों के नवीनीकरण का प्रावधान हो संयुक्त परिवार के सदस्यों द्वारा जिन यूनिटों का संचालन किया जा रहा हो उनका लाइसेंस का ट्रांसफर उन व्यक्तियों के नाम कर दिया जाना चाहिए जो काम कर रहे हैं ।यदि एक व्यक्ति के पास 5 या 10 यूनिट है और उसके परिवार के लोग काम कर रहे हैं उन सभी यूनिटों उनके परिवार के सदस्यों के नाम स्थानांतरित कर उन्हें अपने जीवन यापन करने का मौका देना चाहिये।

सहकारिता के नियम को अपनाते हुए वेन्डर कोआपरेटिव सोसाइटीज के संचालन वाली कमेटी एवं उस के तहत कार्य करने वाले सभी सदस्यों को कार्य जारी रखने हेतु सभी यूनिटों का नवीनीकरण आवश्यक है तभी सरकार के सहकारिता Andolan को बढ़ावा मिलेगा।

चाय पूरी पकौड़ा कॉफी इत्यादि प्लेटफॉर्म पर बिक्री की जाने वाली वस्तुएं की रेट लिस्ट 2012 के बाद अभी तक जारी नहीं की गई जबकि 2012 से अभी तक महंगाई कई गुना बढ़ी है एवं रेलवे द्वारा लाइसेंस फीस भी कई गुना बढ़ाई गई है रेलवे ,रेट लिस्ट के मामले में मौन धारण किए हुए हैं जिससे प्लेटफार्मों पर ओवर चार्जिंग हो रही है इसको रोकने के लिए आवश्यक है कि बिक्री की जाने वाली वस्तुओं की कीमतें आज के बाज़ार भाव के आधार पर निर्धारित की जाए। रेट लिस्ट जारी करने के लिए मंडल रेल प्रबंधक को अधिकार दिया जाना चाहिए ताकि वह अपने अपने – अपने क्षेत्राधिकार के अंतर्गत वहां के खान-पान की व्यवस्था के अनुसार अपने रेट निर्धारित कर सके ।

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