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इतिहास के पन्नो पर डेरा सच्चा सौदा

दिल्ली: इस संसार में जितने भी महान संत, महापुरुष, दार्शनिक, समाज सुधारक हुए हैं, सभी का पहले किसी न किसी रुप में विरोध हुआ है। उनकी दूरगामी सोच, सामाजिक कुरीतियों को दूर कर सामाजिक बदलाव की कोशिशों का पहले विरोध ही हुआ है। उन्हें गलत करार देकर उनकी जन कल्याण की भावनाओं का शुरु में मजाक ही उड़ाया गया और उन को समाज में गलत साबित करने के लिये कई तरह के लांछन लगाकर उन महापुरुषों का अपमान कर सामाजिक बहिष्कार तक किया गया। ऐसा कलयुग ही नहीं, सभी युगों में सदियों से होता आया है।

इतिहास इस बात का गवाह ही कि भारत ही नहीं बल्कि सारी दुनिया में महापुरुषों व संतों से साथ ऐसा व्यवहार हुआ है। भारत में अधिकांश लोग सदियों से चले आ रही सामाजिक रीति रिवाजों, रूढ़िवादिता, परम्परागत सोच, अंधविश्वास, कुरीतियों से बाहर ही नहीं निकलना चाहते। जिन लोगों ने समाज में नई चेतना जागकर आधुनिक और व्यवहारिक सोच पैदा करने की कोशिश की, उनका विरोध हुआ और इन्हें शारारिक व मानसिक कष्ट दिया गया। इन महापुरुषों व संतों के खिलाफ षड्यंत्र रचे गए और अनेक स्थानों पर सार्वजनिक अपमान जनक व्यवहार किया गया।

इतिहास के पन्नों पर नज़र डाली जाये तो पता चलता है कि ईसा मसीह, राम मोहन राय, कबीर दास, सुकरात, सैयद अली जैसे महापुरुषों, संतों, समाज सुधारकों को भी सामाजिक बदलाव के लिये उठाये गये प्रारम्भिक प्रयासों के समय समाज के एक बड़े तबके का विरोध झेलना पड़ा था। लेकिन अपने लक्ष्य के प्रति सच्चे और पक्के इरादे होने के कारण तमाम परेशानियां उठाने के बावजूद उन्होंने अपनी हार नहीं मानी और देर से ही सही लोगों ने उनकी बात को समझा और फिर उनके साथ समाज खड़ा हुआ तो ये सब अपने जन कल्याणकारी, सामाजिक बदलाव लाने में सफल हुए और विश्व भर में उनकी ख्याति फैली।

ऐसा ही कुछ वर्तमान युग से संत राम रहीम जी के साथ हो रहा है। उन्होंने अपने समर्थकों व अनुयायियों के साथ मिलकर स्वम् के बल पर बहुत ही कम समय में भारत में नहीं विदेश तक में ऐसे महान कार्य किये हैं जो मानवता के लिए एक मिशाल बना दिया देश भर में करोड़ों की संख्या में पौधे लगवाना, करोड़ों लोगों से शराब छुड़वाना, बड़े पैमाने पर नियमित डेरा अनुयायियों का रक्तदान करके करोड़ों लोगों को नवजीवन देना, समाज से ठुकराई गई वेश्याओं कि मूलधारा में लाए व नया जीवन दे कर जिंदगी जीने कि राह दिखाई, किन्नरों के प्रति अपनी संवेदना दिखाते हुए नया नाम नया संसार बना दिए यह कार्य किसी करामात से कम नहीं है।

इतना ही नहीं कई सामाजिक कार्यों में तो गिनीज विश्व रिकॉर्ड व अन्य विश्व रिकॉर्ड भी हासिल कर देश का मान बढाया है ………इतना सब कुछ करने वाले डेरा सच्चा सौदा के प्रमुख संत बाबा राम रहीम बेशक एक सच्चे समाज सुधारक, इंसानियत की सजीव मिसाल, परोपकारी, जन कल्याणकारी, सदगुरु हैं और सारा जीवन सद्कर्मो व मानव सेवा के प्रति समर्पित रहने के बाबजूद उन्हें जिल्लत और यातनाएँ झेलनी पड़ रही है. आदि काल से ही यह रीत चलती आई है की समाज से बुराई व कुप्रथाओं को ख़त्म करने का बीड़ा उठाने वाले को विभिन्न संकटों से जूझना पड़ा है। विभिन्न अवतारों के अलग अलग समय पर अवतार लेने के बावजूद उन सब में एक समानता ज़रूर देखने को मिलती है कि उन के अवतरण के समकालीन जनता में से उन के साथ चंद लोग ही जुड़े बाक़ी सब तो उन के विरोध में ही शामिल रहे। शायद इसी दंश को बाबा रम रहीम भी झेल रहे हों। हो ना हो बाबा की कमी देश को या यूँ कहें की देश के सच्चे हितैषियों को तो आपदा प्रबंधन के समय ज़रूर खलती है जैसे इस बार के स्वतंत्रता दिवस पर बाबा के अनुयायियों की तरफ़ से मात्र 24 लाख 84 हज़ार 500 पौधे ही लगाए गए जहाँ पिछले 3-4 सालों से यह आँकड़ा 50 लाख के पार था. इसी प्रकार केरल में भी बाढ़ग्रस्त लोगों तक जो मदद बाबा के अनुयायियों के द्वारा पहुँचाई गई वह उन के सामर्थ्य के अनुसार काफ़ी कमतर आँकी गई । यक़ीनन बाबा यदि बाहर होते तो यह आँकड़ा काफ़ी आगे होता जिससे और अधिक लोगों को मानवता की भलाई के कार्यों की प्रेरणा मिलती।

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